उत्तर प्रदेश सरकार के बजट में अनुदेशकों, शिक्षामित्रों एवं रसोइयों के मानदेय में वृद्धि तथा नियमितीकरण को लेकर कोई ठोस घोषणा न होने से बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े संविदा कर्मियों में गहरी निराशा व्याप्त है। वर्षों से अल्प मानदेय पर कार्य कर रहे इन कर्मियों को इस बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों की अनदेखी से असंतोष बढ़ गया है। उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन बाराबंकी के जिलाध्यक्ष दिवाकर अवस्थी “गांधी” ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “दशकों से संविदा कर्मी बेसिक शिक्षा की रीढ़ बने हुए हैं।
ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों में अनुदेशक और शिक्षामित्र पूरी निष्ठा से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, वहीं मध्यान्ह भोजन योजना को सफल बनाने में रसोइयों की अहम भूमिका है। इसके बावजूद मानदेय वृद्धि और नियमितीकरण जैसे मुद्दों पर सरकार द्वारा कोई ठोस निर्णय न लिया जाना बेहद निराशाजनक है।” उन्होंने आगे कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अल्प मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना कठिन होता जा रहा है। ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए सेवा सुरक्षा, मानदेय वृद्धि और अन्य लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। जिलाध्यक्ष ने सरकार से पुनर्विचार कर संविदा कर्मियों की समस्याओं का समाधान करने की अपील की, ताकि बेसिक शिक्षा से जुड़े लाखों परिवारों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।
