बेसिक स्कूलों में पदोन्नति और प्रधानाध्यापक पद की व्यवस्था
बात सिर्फ पदोन्नति पाने की नहीं, बल्कि विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक व्यवस्था बनाने की भी है।
अगर प्राथमिक विद्यालय में 150 बच्चों और जूनियर हाईस्कूल में 100 बच्चों की अनिवार्यता के कारण ही प्रधानाध्यापक का पद निर्धारित होगा, तो छोटे विद्यालयों में वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों का क्या होगा?
🏫 हर विद्यालय को एक जिम्मेदार मुखिया चाहिए।
विद्यालय छोटा हो या बड़ा, वहाँ बच्चों की पढ़ाई, शिक्षकों के बीच समन्वय, अभिलेखों का रखरखाव और विभागीय कार्यों की जिम्मेदारी तो होती ही है।
✅ पदोन्नति की प्रक्रिया पारदर्शी हो।
✅ वरिष्ठता और सेवा अनुभव का सम्मान हो।
✅ प्रधानाध्यापक के पदों का सृजन व्यावहारिक जरूरतों के अनुसार हो।
✅ शिक्षकों को वर्षों तक पदोन्नति की प्रतीक्षा में न रखा जाए।
विद्यालयों की गुणवत्ता केवल छात्र संख्या से नहीं, बल्कि बेहतर नेतृत्व, संसाधनों और शिक्षकों के सम्मान से भी तय होती है।
📌 अब देखना यह है कि पदोन्नति की राह आसान होती है या शिक्षक फिर नियमों के फेर में उलझकर रह जाते हैं!
