फिरोजाबाद। परिषदीय स्कूलों का कॉंवेंट से मुकाबला करने की होड़ मची है। शासन द्वारा कायाकल्प के तहत स्कूलों का भौतिक वातावरण सुधारा जा रहा है। मगर, शासन की अनदेखी के कारण परिषदीय स्कूल आज भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। 10 माह में करीब 1332 नए शिक्षक जिले में मिल चुके हैं। इसमें 1257 को स्कूल आवंटन हो गया है।
मगर फिर भी स्कूल एकल संचालित हो रहे हैं। इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। क्योंकि एक शिक्षक विभागीय कार्यों में उलझे रहते हैं। हाल में ही स्कूल आवंटन प्रक्रिया में शासन ने उन्हीं स्कूलों में शिक्षकों को पहुंचा दिया गया है, जिनमें पहले से ही कई शिक्षक तैनात हैं।
अभिभावक और विद्यार्थी पारस्परिक तबादला से आए शिक्षकों को एकल विद्यालय में तैनाती मिलने की उम्मीद लगाए हुए थे।
शासन ने ऐसे विद्यालयों में शिक्षकों को तैनाती दे दी, जहां पूर्व से कई शिक्षक हैं। इसी तरह अंतर जनपदीय तबादला और 69 हजार शिक्षक भर्ती में आए शिक्षकों को एकल या बंद पड़े विद्यालय में पहुंचाने के बजाय शहर के आसपास के स्कूलों में ही तैनात कर दिया गया। कई स्कूलों में कक्षाओं से ज्यादा शिक्षक तैनात हो गए है। कहीं तो सिर्फ शिक्षामित्र ही स्कूलों की जिम्मेदारी देख रहे हैं। बड़ी संख्या में नए शिक्षक जिले में आने के बाद भी एकल विद्यालयों से बच्चों को मुक्ति नहीं मिली है।
