बीएसए को दी धरने की सूचना, उच्च न्यायालय के आदेश की प्रति सौंपी
ललितपुर । उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने पूर्व में की मांगों के पूरा नहीं होने पर दस नवंबर से फिर से धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए संघ के पदाधिकारियों ने सोमवार को बीएसए से मिलकर धरने व उच्च न्यायालय के एक आदेश की प्रति सौंपी।
बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की लचर कार्यप्रणाली विभाग में व्याप्त अनियमितताओं के चलते शिक्षकों के हो रहे उत्पीड़न के विरुद्ध उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया द्वारा विभिन्न ज्ञापनों के माध्यम से उच्च अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया था, जिसमें शिक्षा सत्र आरंभ हुए आठ माह बीतने के बाद भी बच्चों के लिए पूरी पाठ्य पुस्तकों का न पहुंचाया जाना और जो भेजी भी गई हैं उनका छात्र संख्या के अनुरूप न होने की बात कही गई है।
इसके अलावा पदोन्नति की प्रक्रिया को शुरू न किया जाना चहेतों को चयन वेतनमान स्वीकृत कर अधिसंख्य शिक्षकों को वंचित रखा जाना, अनुसूचित जाति/जनजाति के शिक्षकों के चयन वेतनमान की स्वीकृति में भी कतिपय शिक्षकों को लाभ देकर शेष को छोड़ देने की बात कही गई है
वहीं बीएसए को प्रेषित ज्ञापन में शिक्षकों के पक्षपात पूर्ण ढंग से किए जा रहे निरीक्षणों पर आपत्ति कर कार्रवाई निरस्त किए जाने एवं अन्य समस्याओं को हल करने की मांग भी की थी लेकिन समस्याओं के निराकरण के लिए निर्धारित समय सीमा व्यतीत हो जाने के बाद भी किसी भी समस्या के निराकरण न होने पर 10 नवंबर को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के समक्ष धरना निश्चित हो गया।।संयुक्त राज्य कर्मचारी परिषद ने अपने सभी घटक दलों के साथ अपना समर्थन देने का ऐलान किया। सोमवार को पुनः संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने धरने की सूचना एवं उच्च न्यायालय के उस आदेश की प्रति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दी।
ज्ञापन देते समय जिला मंत्री अरुण गोस्वामी, जिला कोषाध्यक्ष आलोक श्रीवास्तव, प्रभारी कोषाध्यक्ष देवेंद्र जैन, जिला मीडिया प्रभारी संतोष रजक, ब्लॉक बिरधा के अध्यक्ष मनोज कुमार झा, ब्लॉक जखौरा के मंत्री आलोक स्वामी ब्लॉक बिरधा के उपाध्यक्ष पवन सैनी उपस्थित रहे।
ये भी हैं मांगें
ललितपुर । शिक्षकों द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को एसीपी के लाभ से वंचित रखना और 69000 भर्ती के अध्यापकों के वेतन अवशेष भुगतान में पारदर्शिता का अभाव, एआरपी/एसआरजी के द्वारा अपने मूल दायित्वों को छोड़ मनमर्जी से काम करना, शासनादेश के विरुद्ध मनमर्जी से शिक्षकों एवम अनुदेशकों को कार्यालयों में संबद्ध रखने की मांग की गई। इसके अलावा ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर कार्यरत कर्मियों का अपने कार्यालय में नियमित व समय से न बैठते हुए अन्य ब्लॉक संसाधन केंद्रों के चक्कर लगाना, सेवा पंजिका में अद्यतन प्रविष्टि न होना, नवनियुक्त अध्यापकों के सत्यापन की सूची कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा न कर उन्हें टहलाया जाना आदि समस्याओं का निर्धारित समयावधि तक निराकरण करने की मांग की थी।
