Gold Silver Rate Today: धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। मंगलवार को घरेलू वायदा बाजार MCX में कीमती धातुओं के भाव अचानक फिसल गए। चांदी की कीमत में करीब 5 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी लगभग 2 फीसदी टूट गया। लगातार गिरते भाव से जहां निवेशकों की चिंता बढ़ी है, वहीं त्योहारों पर सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों को राहत मिल सकती है।
मंगलवार दोपहर को चांदी का वायदा भाव गिरकर करीब ₹1.75 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया। वहीं सोने की कीमत भी प्रति 10 ग्राम ₹1.38 लाख से नीचे फिसल गई। बाजार में आई इस अचानक गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
सोने-चांदी की कीमतों में कितनी आई गिरावट?
इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ था। जनवरी में सोने का भाव बढ़कर करीब ₹1.91 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। मौजूदा स्तर से तुलना करें तो सोना अपने उच्चतम स्तर से लगभग ₹53,000 तक सस्ता हो चुका है।
चांदी की कीमतों में इससे भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। जनवरी में MCX पर चांदी का भाव करीब ₹4.21 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था, जबकि अब इसकी कीमत काफी नीचे आ चुकी है।
रिपोर्ट में दिए गए भावों के अनुसार, चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग ₹2.43 लाख प्रति किलोग्राम तक टूट चुकी है। हालांकि, वायदा बाजार और सर्राफा बाजार के भावों में अंतर हो सकता है।
सोने-चांदी में अचानक गिरावट क्यों आई?
सोने और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। इनमें अमेरिकी डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और निवेशकों की मुनाफावसूली प्रमुख हैं।
1. डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड मजबूत होने से सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ता है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं में सोना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग प्रभावित हो सकती है।
2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें
अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती है। ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका से निवेशकों का रुझान ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की तरफ बढ़ सकता है। चूंकि सोने पर ब्याज नहीं मिलता, इसलिए ऐसे माहौल में इसकी मांग प्रभावित होती है।
3. चांदी की औद्योगिक मांग में कमजोरी
चांदी का इस्तेमाल केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे उद्योगों में भी इसकी बड़ी मांग रहती है। औद्योगिक मांग कमजोर होने और चीन से मांग को लेकर चिंताओं के कारण चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
4. निवेशकों की मुनाफावसूली
सोने और चांदी की कीमतों में पहले आई तेज तेजी के बाद बड़े निवेशकों और फंड हाउसों ने मुनाफा निकालना शुरू किया। इस बिकवाली के कारण बाजार में गिरावट और तेज हो गई।
धनतेरस और दिवाली पर सोना-चांदी खरीदने वालों को राहत?
धनतेरस और दिवाली पर भारत में सोना-चांदी खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। ऐसे में त्योहारों से ठीक पहले कीमतों में आई गिरावट आम खरीदारों के लिए राहत भरी खबर हो सकती है।
जिन परिवारों ने ऊंचे भाव के कारण सोना-चांदी खरीदने का फैसला टाल दिया था, उन्हें अब अपेक्षाकृत कम कीमत पर खरीदारी का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, यह जरूरी नहीं कि मौजूदा गिरावट के बाद कीमतें लगातार नीचे ही जाएं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी बड़े घटनाक्रम का असर घरेलू बाजार पर तुरंत दिखाई दे सकता है।
सोना-चांदी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए खरीदारों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए।
खरीदारी से पहले अपने शहर के ताजा सोने-चांदी के भाव जरूर जांचें।
सोने की खरीदारी में हॉलमार्क और 6 अंकों वाला HUID नंबर अवश्य देखें।
चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता और बिल की जांच करें।
ज्वेलरी खरीदने पर मेकिंग चार्ज और GST की जानकारी लें।
निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वाले लोग अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखें।
आगे क्या और सस्ता होगा सोना-चांदी?
सोने और चांदी की कीमतों में आगे क्या रुख रहेगा, यह कई वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़े फैसले, महंगाई के आंकड़े, औद्योगिक मांग और वैश्विक निवेशकों की गतिविधियां कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
त्योहारी सीजन में भारत की घरेलू मांग कीमतों को कुछ समर्थन दे सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकवाली जारी रहने पर दबाव बना रह सकता है।
निष्कर्ष: धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने खरीदारों को राहत का मौका दिया है। हालांकि, निवेश करने से पहले ताजा बाजार भाव और अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन जरूर करें।
