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Monday, October 26, 2026

शिक्षामित्रों की मांग अगर जायज है, तो उनका समर्थन भी होना चाहिए!

शिक्षामित्रों की मांग अगर जायज है, तो उनका समर्थन भी होना चाहिए!

साथियों, एक बार शिक्षामित्रों की स्थिति को भी समझिए। लगभग 26 वर्षों से विभाग में सेवा देने वाले, बच्चों को पढ़ाने का अनुभव रखने वाले और आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं पूरी करने वाले शिक्षामित्र आज भी अपने भविष्य और सम्मानजनक मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।




वहीं, नियमित शिक्षकों को निर्धारित वेतनमान और अन्य सेवा लाभ मिलते हैं, जबकि शिक्षामित्रों को लगभग ₹18,000 मानदेय मिलने की बात कही जाती है।


जब दोनों का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा देना है, तो शिक्षामित्रों के अनुभव, सेवा अवधि और आर्थिक स्थिति पर गंभीरता से विचार क्यों नहीं होना चाहिए?


यह बहस नियमित शिक्षकों के अधिकारों को कम करने की नहीं, बल्कि शिक्षामित्रों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार की मांग है। नियमित शिक्षकों ने भी अपनी योग्यता, चयन प्रक्रिया और सेवा शर्तों के आधार पर अपना स्थान प्राप्त किया है। उनके अधिकारों का सम्मान करते हुए शिक्षामित्रों की समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए।


न्याय का अर्थ किसी एक वर्ग के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि हर वर्ग के साथ उचित व्यवहार करना है।


यदि शिक्षामित्रों की मांग नियमों और तथ्यों के आधार पर जायज है, तो उनका समर्थन होना चाहिए। 26 वर्षों की सेवा, अनुभव और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।


आइए, इस मुद्दे पर आपसी विरोध के बजाय संवाद, संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण समाधान की मांग करें।


आपकी राय क्या है? क्या लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षामित्रों के मानदेय और सेवा शर्तों में सुधार होना चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।

शिक्षामित्रों की मांग अगर जायज है, तो उनका समर्थन भी होना चाहिए! Rating: 4.5 Diposkan Oleh: UP UPDATEMART

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