फर्जी शासनादेश से पद पर बने रहने की छूट नहीं
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में निदेशक (प्रकाशन) के पद और उसकी सेवानिवृत्ति आयु से जुड़े मामले में स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेज के आधार पर किसी भी प्रकार का साम्या या कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं किया जा सकता।
इस आदेश के साथ न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत डॉ पद्माकर मिश्र को निदेशक (प्रकाशन) पद पर 62 वर्ष की आयु तक कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई थी। खंडपीठ ने विश्वविद्यालय की विशेष अपील स्वीकार करते हुए पदधारक की अपील खारिज कर दी।

