कहते हैं जिनके कंधों पर व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी है अगर वही लापरवाह हो जाए तो बनी व्यवस्थाओं के बिगड़ने मे जरा भी देर नहीं लगती। शनिवार को खंड शिक्षाधिकारी मानिकपुर कृष्ण दत्त पाण्डेय ने पाठा क्षेत्र के दर्जनों स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण किया।
एबीएसए के औचक निरीक्षण से महकमे में खलबली मच गई। चाय पान की दुकानों में गप्पे मार रहे शिक्षक खंड शिक्षाधिकारी के निरीक्षण की सूचना मिलते ही दौड़ते-भागते तत्काल स्कूल पहुंचे। शिक्षक खंड शिक्षाधिकारी के स्कूल आने पर बच्चों को खड़े होकर अभिवादन और कतारबद्ध बैठने की सीख देने लगे। निरीक्षण के दौरान कंपोजिट विद्यालय जारोमाफी के मुख्य द्वार से ही वापस हो गए। जो कई सवाल खड़े कर रहा है ? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खंड शिक्षाधिकारी मानिकपुर कृष्ण दत्त पाण्डेय ने याराना निभाते हुए कंपोजिट विद्यालय के प्रधानाध्यापक का स्कूल का निरीक्षण नहीं किया।
सूत्रों ने यह भी बताया कि कंपोजिट विद्यालय जारोमाफी के प्रधानाध्यापक अशोक सिंह का एबीएसए के पास फोन आने पर स्कूल को बिना चेक किए ही वापस लौट गए। आखिर जब स्कूल तक गए तो निरीक्षण क्यों नहीं किया।
उक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक पिछले 15 दिनों से मेडिकल अवकाश पर चल रहे हैं। सूत्रों से यह जानकारी भी मिली की उक्त प्रधानाध्यापक एबीएसए कृष्ण दत्त पाणि के साथ प्रयागराज से प्रतिदिन अप-डाउन करता है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब एक जिम्मेदार अधिकारी ही लापरवाह शिक्षक पर कार्यवाही करने के बजाय रहमोकरम करेगा तो प्राथमिक शिक्षा की हालत कैसे सुधरेगी? एक जिम्मेदार अधिकारी को चाहिए की बगैर किसी भेदभाव के लापरवाहियों के खिलाफ कार्यवाही करें। एसे मे नौनिहालों का भविष्य क्या होगा ? जन एक्सप्रेस अखबार प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा की बिगड़ी व्यवस्थाओं के खिलाफ अभियान चला रहा है। शिक्षा के मंदिरों मे गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार की पाठशालाएं लगाई जा रही हैं।
