शिक्षिकाओं को 730 दिनों तक शिशु देखभाल अवकाश, पुरुषों को 15 दिनों का पितृत्व अवकाश
शिक्षकों को अवकाश देने के संबंध में राज्यस्तरीय मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गयी है. बिहार के सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को अब छुट्टी के लिए इ-शिक्षाकोष पोर्टल के लीव मॉड्यूल से ऑनलाइन आवेदन करना होगा. शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, यह व्यवस्था पांच सितंबर से लागू है. आकस्मिक अवकाश के आवेदन पर उसी दिन निर्णय लेना होगा, जबकि अन्य छुट्टियों के लिए आवेदन को अधिकतम सात कार्यदिवस में निबटाना होगा. तय समय पर अगर उस पर विचार नहीं होता है तो वह आवेदन
स्वतः अग्रसारित हो जायेगा. शिक्षकों को पोर्टल या मोबाइल एप पर लॉगिन कर छुट्टी का प्रकार, अवधि और कारण दर्ज करने के साथ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे. आकस्मिक अवकाश को छोड़कर अन्य छुट्टियों के लिए पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है. विभागीय निर्देश के अनुसार, पात्र महिला कर्मियों को 180 दिनों का मातृत्व अवकाश और पूरे सेवाकाल में अधिकतम 730 दिनों का शिशु देखभाल अवकाश मिल सकता है. शिशु देखभाल अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम तीन बार स्वीकृत होगा. एक बार में न्यूनतम 15 दिन से कम की मंजूरी नहीं की जायेगी. शिशु देखभाल के लिए महिला कर्मियों के लिए कोई उम्र निर्धारित नहीं है, पर
बिना मंजूरी छुट्टी पर कार्रवाई
निर्धारित समय में आवेदन पर निर्णय नहीं होने पर वह अगले सक्षम अधिकारी को स्वतः अग्रसारित हो जायेगा. जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन मिलने के सात कार्यदिवस के भीतर अंतिम फैसला लेना होगा. बिना स्वीकृति लगातार अनुपस्थित रहने पर वेतन स्थगित करने और
नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है.
शिशु की उम्र 18 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए. वहीं, महिला शिक्षकों को मातृत्व अवकाश 180 दिनों तक पूर्ण वेतन के साथ मिलेगा. पुरुष शिक्षकों को पितृत्व अवकाश के लिए लगातार 15 दिनों तक की छुट्टी दी जा सकेगी.

