इंतजार: रिक्त पदों के सत्यापन में अटकी प्रधानाचार्यों की भर्ती, अर्हता को लेकर दायर है याचिकाएं
प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 1172 एवं प्रधानाध्यापक के 1475 पदों पर भर्ती रिक्त पदों के सत्यापन में फंसी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को रिक्त पदों की सूचना भेजी थी। इसी के आधार पर आठ अक्तूबर से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तावित थे।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को भेजे गए प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों का सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया था। हाईकोर्ट ने विज्ञापन में 2019, 2021-22 और 2026 में प्राप्त अधियाचन का जिक्र करने को भी कहा है। 13 साल बाद 2647 पदों पर शुरू होने जा रही भर्ती से पहले सत्यापन करवाने में समय लग गया। उम्मीद है कि दशहरा की छुट्टियों के बाद ऑनलाइन आवेदन शुरू हो जाएंगे। चयन आयोग के पीआरओ डॉ. संजय कुमार सिंह का कहना है कि सत्यापन का काम लगभग पूरा है जल्द ही प्रधानाचार्य भर्ती के आवेदन शुरू होंगे।
अर्हता को लेकर दायर है याचिकाएं
प्रधानाचार्य भर्ती के नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में याचिकाएं दायर कर रखी हैं। सर्वाधिक विरोध बीएड और परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि बिना बीएड नियुक्त हजारों शिक्षक आवेदन से वंचित हो जाएंगे। वहीं परास्नातक में 50 प्रतिशत की अनिवार्यता संबंधी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की कोई गाइडलाइन नहीं होने के बावजूद इसे लागू करने को अनुचित बता रहे हैं।

