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Sunday, October 25, 2026

Child Mental Health: बच्चों में डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर के लक्षण, पढ़ाई पर पड़ रहा असर

Child Mental Health: बच्चों में डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर के लक्षण, पढ़ाई पर पड़ रहा असर

Child Mental Health News: डिजिटल दुनिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बच्चों और किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण चिंता बनता जा रहा है। गोरखपुर से प्रकाशित समाचार रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों में मूड डिसऑर्डर और डिप्रेशन जैसी समस्याएं उनकी पढ़ाई, व्यवहार और दैनिक कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों ने शुरुआती लक्षणों को पहचानने और समय पर मदद उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।




12 से 14 साल की उम्र में दिख सकते हैं अवसाद के लक्षण

बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के शुरुआती संकेतों को अक्सर सामान्य व्यवहार समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन लंबे समय तक उदासी, चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में मन नहीं लगना और सामाजिक गतिविधियों से दूरी जैसे बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।


समाचार रिपोर्ट में बताया गया है कि मानसिक परेशानी का असर बच्चों की एकाग्रता, सीखने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की योग्यता पर पड़ सकता है।


डिजिटल एडिक्शन भी बन सकता है चिंता का विषय

डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मोबाइल के कारण बच्चों की नींद, पढ़ाई, शारीरिक गतिविधियां या परिवार के साथ समय बिताना प्रभावित होने लगे, तो उनकी डिजिटल आदतों पर ध्यान देना चाहिए।


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि डिजिटल एडिक्शन केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत वयस्कों में भी हो सकती है।


बच्चों में मानसिक परेशानी के प्रमुख संकेत

माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में लगातार होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:


लंबे समय तक उदास या चिड़चिड़ा रहना।


पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों में रुचि कम होना।


एकाग्रता में कमी और काम पूरा करने में परेशानी।


दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना।


नींद या दैनिक दिनचर्या में बदलाव।


पहले पसंद आने वाली गतिविधियों से रुचि खत्म होना।


इनमें से कोई एक लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को डिप्रेशन है। हालांकि, यदि कई बदलाव लगातार बने रहें और दैनिक जीवन प्रभावित हो, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।


कोविड के बाद बच्चों की मानसिक समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत

समाचार रिपोर्ट में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से कोविड महामारी के बाद बच्चों और किशोरों की मानसिक परेशानियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई है।


बच्चों को सोशल मीडिया और AI से मिलने वाली जानकारी को समझने, उसका मूल्यांकन करने और जरूरत पड़ने पर सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। तकनीक का इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे बच्चों की भावनात्मक और सामाजिक जरूरतों का विकल्प नहीं बनना चाहिए।


कम उम्र में मोबाइल देने से बचें

प्रयागराज के वरिष्ठ मनोरोग चिकित्सक डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कम उम्र में बच्चों को मोबाइल देने से उनके सामाजिक और भाषा विकास पर असर पड़ सकता है।


माता-पिता को बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताना चाहिए। उन्हें खेलकूद, किताबें पढ़ने, परिवार के साथ बातचीत और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। मोबाइल के इस्तेमाल के लिए उम्र के अनुरूप स्पष्ट नियम बनाना भी उपयोगी हो सकता है।


नशे की लत और मानसिक स्वास्थ्य पर भी चिंता

रिपोर्ट में सिंथेटिक नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर उनके संभावित गंभीर प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है।


विशेषज्ञों के अनुसार, नशीले पदार्थों का सेवन सोचने-समझने की क्षमता, व्यवहार और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। शुरुआती लक्षणों को पहचानना महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई बार समस्या के शुरुआती संकेत स्पष्ट नहीं होते।


माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा में परिवार और स्कूल दोनों की अहम भूमिका है। माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की बात ध्यान से सुननी चाहिए और उनके व्यवहार में लगातार बदलाव दिखने पर संवेदनशीलता के साथ मदद करनी चाहिए।


यदि बच्चा लंबे समय से उदास है, पढ़ाई में लगातार परेशानी महसूस कर रहा है या उसके व्यवहार में गंभीर बदलाव आ रहे हैं, तो बाल मनोवैज्ञानिक अथवा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।


निष्कर्ष: बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य उनकी शिक्षा, व्यक्तित्व और भविष्य के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। डिजिटल उपकरणों का संतुलित उपयोग, पर्याप्त नींद, खेलकूद, परिवार का सहयोग और समय पर विशेषज्ञ की मदद बच्चों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं।

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