चार साल, दो बार परीक्षा परिणाम, अधर में भविष्य
साक्षात्कार पर रोक, आयोग से लौटाए गए अभ्यर्थी
प्रयागराज,। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर भर्ती के अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में फंसा हुआ है। 2022 में भर्ती शुरू होने के चार साल में दो बार लिखित परीक्षा कराई गई और दो बार परिणाम भी घोषित हुआ लेकिन आज भी नतीजा सिफर है। एक परीक्षा अनियमितता के कारण पहले निरस्त हो चुकी है जबकि दूसरी परीक्षा कानूनी अड़चन में फंसती दिख रही है। इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने मंगलवार से शुरू हुए साक्षात्कार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हालांकि बुधवार सुबह आठ बजे से पहले ही 100 से अधिक अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए चयन आयोग पहुंच चुके थे।
आयोग के अधिकारियों ने अभ्यर्थियों के बीच पहुंचकर साक्षात्कार स्थगित करने की जानकारी दी और उनसे वापस लौटने का अनुरोध किया। उसके बाद जो अभ्यर्थी पहुंचे उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने साक्षात्कार स्थगित होने की जानकारी दी। उपसचिव और पीआरओ डॉ. संजय सिंह के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में लंबित एसएलपी में सोमवार को पारित आदेश जिसकी जानकारी आयोग को मंगलवार को हुई, के अनुपालन में असिस्टेंट प्रोफेसर (विज्ञापन संख्या-51) के तहत 22 जुलाई से 13 अगस्त तक प्रस्तावित साक्षात्कार कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता हैं। साक्षात्कार की पुनर्निर्धारित तिथियों एवं अन्य आवश्यक निर्देशों की सूचना आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से प्रकाशित की जाएगी।
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) ने वर्ष 2022 में विज्ञापन संख्या-51 जारी कर सहायक प्रोफेसर के 910 पदों पर नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। अनियमितता पर जब सरकार ने 2025 में हुई परीक्षा निरस्त की तो कुछ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की थीं। हाईकोर्ट ने केवल पांच विषयों (उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और जंतु विज्ञान) की ही पुनर्परीक्षा कराने के आदेश दिए थे। हालांकि इसके खिलाफ आयोग और कुछ अन्य अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका की थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी जिसके बाद चयन आयोग ने लिखित परीक्षा कराते हुए परिणाम जारी किया और मंगलवार से साक्षात्कार शुरू कर दिए। इस बीच मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई तो जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एस चंद्रशेखर की पीठ ने इस मामले में 25 मई 2026 के अंतरिम आदेश को प्रभावी बताते हुए, मामले में सक्षम प्राधिकारों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर को होगी।

