भ्रष्टाचार और अभद्रता के आरोपों पर बीआरसी में बड़ी कार्रवाई
कानपुर देहात। विकासखंड सन्दलपुर के ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) में भ्रष्टाचार, अवैध धन उगाही और शिक्षकों से अभद्रता के आरोपों के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) आशीष कुमार पाण्डेय ने बीआरसी में संबद्ध दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों आयुष चौधरी और रोहित पाल की संबद्धता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उन्हें उनके मूल विद्यालयों में भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट भी तलब की गई है।
जानकारी के अनुसार, 13 जुलाई 2026 को विकासखंड सन्दलपुर के कई शिक्षकों ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ साक्ष्यों सहित लिखित शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बीआरसी में तैनाती के दौरान दोनों कर्मचारी भ्रष्टाचार, अवैध धन उगाही और शिक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे। मामला कलेक्ट्रेट से प्राप्त संदर्भ पत्र के माध्यम से बीएसए कार्यालय पहुंचा, जिसके बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया।
बीएसए आशीष कुमार पाण्डेय ने खंड शिक्षा अधिकारी सन्दलपुर आनंद भूषण को निर्देश जारी करते हुए दोनों कर्मचारियों को तत्काल बीआरसी से कार्यमुक्त कर उनके मूल विद्यालयों में भेजने को कहा। साथ ही कार्रवाई की जियो-टैग फोटो सहित अनुपालन आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बीएसए ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में स्पष्टीकरण और जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई तो खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
खंड शिक्षा अधिकारी सन्दलपुर आनंद भूषण ने बताया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देशों का तत्काल पालन करते हुए दोनों कर्मचारियों को बीआरसी सन्दलपुर से कार्यमुक्त कर उनके मूल विद्यालयों में भेज दिया गया है। कार्रवाई की अनुपालन आख्या जियो-टैग फोटो के साथ तैयार कर ली गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की शिकायत के प्रत्येक बिंदु की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को भेज दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता पारदर्शी और जवाबदेह कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी।

