यूपी में फॉर्म-7 जमा करने से जुड़ी गड़बड़ी जांचें: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से सुधारात्मक कदम उठाने को भी कहा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह उत्तर प्रदेश में एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने के फॉर्म-7 जमा किए जाने से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों की जांच करे। साथ ही जरूरी सुधारात्मक कदम भी उठाए।
इससे पहले, चुनाव आयोग ने शीर्ष अदालत में स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर फार्म-7 जमा कराए गए थे, लेकिन जांच में वे फर्जी पाए गए, इसलिए उन पर कार्रवाई नहीं की गई। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे उन अनसुलझी अनियमितताओं को चिह्नित करते हुए एक नोट चुनाव आयोग को सौंपें। पीठ ने कहा 'जिन अनियमितताओं को अदालत के संज्ञान में लाया गया है, उन्हें एक नोट के रूप में निर्वाचन आयोग की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ वकील डीएस नायडू को सौंप दिया जाए।' साथ ही निर्देश दिया कि नोट मिलने के बाद आयोग तथ्यों की जांच करे, आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।
फॉर्म -7 एक ऐसा आवेदन पत्र है, जिसका इस्तेमाल मतदाता सूची के मसौदे से किसी मतदाता का नाम हटवाने के लिए किया जाता है। इससे पहले चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने पीठ के समक्ष स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए गए थे।
उन्होंने पीठ से कहा 'आयोग ने पाया कि बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए गए थे। हमारे अधिकारियों ने इनकी दो बार जांच की। ये आवेदन फर्जी थे और हमने इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।' याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि एक निर्वाचन क्षेत्र में किसी विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाने के लिए 32 फॉर्म जमा किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से इस मामले की जांच करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट, कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और अन्य लोगों द्वारा दाखिल उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा, जिनमें उत्तर प्रदेश में एसआईआर को चुनौती दी गई है।
