शिक्षा, नवाचार और समर्पण के जरिए सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदलने की मिसाल पेश कर रही हैं प्राथमिक विद्यालय रजपुरा की शिक्षिका पुष्पा यादव। अपने निरंतर प्रयासों और रचनात्मक पहल से उन्होंने विद्यालय में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक एवं बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।
पुष्पा यादव का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास भी जरूरी है। इसी सोच के साथ वह पिछले कई वर्षों से ग्रामीण परिवेश के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा देने के लिए जुटी हुई हैं।
विद्यालय में स्मार्ट लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम, प्रोजेक्टर, एलईडी टीवी, टैबलेट, वाई-फाई और सीसीटीवी कैमरों जैसी आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने के प्रयास किए गए हैं। वहीं, बच्चों की रुचि बढ़ाने के लिए बिग बुक, फ्लैश कार्ड और विद्यालय परिसर में आकर्षक शिक्षण सामग्री तैयार कराई गई है, जिससे सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाया जा सके।
दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर
पुष्पा यादव के कार्यों में दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना विशेष महत्व रखता है। सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से विद्यालय में उनके लिए सुविधाओं का विकास किया गया है। इसके साथ ही बालिका शिक्षा, अभिभावक जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को भी प्रोत्साहित किया जाता है।
बच्चों की प्रतिभा निखारने के उद्देश्य से वह पिछले दस वर्षों से अपने संसाधनों से समर कैंप आयोजित कर रही हैं। इन शिविरों में गरीब परिवारों के बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने और अपनी क्षमताएं विकसित करने का अवसर मिलता है।
शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राज्य अध्यापक पुरस्कार-2021, उत्कर्ष अध्यापक पुरस्कार, EduLeaders Award और स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार सहित विभिन्न सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
पुष्पा यादव का कहना है कि प्रत्येक बच्चा विशेष होता है। उसे केवल सही अवसर, प्रोत्साहन और सकारात्मक वातावरण की आवश्यकता है। उनकी यही सोच शिक्षा को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने की प्रेरणा दे रही है।
