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Wednesday, October 21, 2026

प्राथमिक शिक्षा का यथार्थ: शिक्षक की गुणवत्ता या व्यवस्था का संकट?

 प्राथमिक विद्यालयों में घटती छात्र संख्या और स्कूलों के बंद होने को केवल "शिक्षकों की गुणवत्ता" से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर का केवल एक पहलू है। आज के प्राथमिक शिक्षक उच्च योग्यता प्राप्त (स्नातक, बी.एड./डी.एल.एड. और कठिन टीईटी/सीटेट परीक्षा उत्तीर्ण) हैं। वास्तविक संकट शिक्षक की योग्यता का नहीं, बल्कि उन व्यवस्थागत परिस्थितियों का है जिनके बीच उन्हें कार्य करना पड़ता है। 



 

गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ: शिक्षकों का मूल दायित्व कक्षा में पढ़ाना है, लेकिन वर्तमान में उनका बड़ा समय विभिन्न सरकारी ऐप पर दैनिक डेटा फीडिंग, बीएलओ ड्यूटी, जनगणना, सर्वेक्षण, मिड-डे मील प्रबंधन, राशन और डीबीटी सत्यापन जैसे दर्जनों गैर-शैक्षणिक कार्यों में खप जाता है। जब एक शिक्षक का ध्यान शिक्षण से हटाकर प्रशासनिक कार्यों में उलझा रहेगा, तो शिक्षण की गुणवत्ता स्वतः प्रभावित होगी।


कक्षा-वार शिक्षकों का भारी अभाव: एक आदर्श विद्यालय में हर कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक और विषयवार व्यवस्था होनी चाहिए। इसके विपरीत, कई प्राथमिक विद्यालयों में 1 से 5 तक की कक्षाओं को संभालने के लिए मात्र एक या दो शिक्षक ही उपलब्ध हैं। एक ही समय में पांच अलग-अलग स्तर के बच्चों को एक साथ पढ़ाना किसी भी शिक्षक के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।


संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी: कॉन्वेंट और निजी स्कूलों से तुलना करते समय यह भूल जाते हैं कि वहां आधुनिक सुविधाएं, डिजिटल संसाधन और सहयोगी स्टाफ उपलब्ध होता है। परिषदीय विद्यालयों में लिपिक (बाबू), सफाईकर्मी या सुरक्षाकर्मी न होने से कार्यालयी फाइलों से लेकर अन्य व्यवस्थाएं भी शिक्षकों को ही संभालनी पड़ती हैं।


सामाजिक व आर्थिक धारणाएं: समाज में तेजी से बढ़ता अंग्रेजी माध्यम और निजी स्कूलों का आकर्षण केवल प्राथमिक स्तर का नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है। मुफ्त राशन, यूनिफॉर्म या छात्रवृत्ति से उपस्थिति तो दर्ज हो सकती है, लेकिन जब तक विद्यालयों को सुसज्जित माहौल नहीं मिलेगा, अभिभावकों की प्राथमिकता बदलना कठिन है।  


यदि प्राथमिक शिक्षा को वास्तव में मजबूत करना है, तो शिक्षकों को हर प्रकार के गैर-शैक्षणिक कार्यों और दर्जनों विभागीय ऐप के दबाव से मुक्त करना होगा। प्रत्येक विद्यालय में प्रति कक्षा एक शिक्षक, सहायक स्टाफ और आधुनिक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही इसका वास्तविक समाधान है, न कि सारा दोष केवल शिक्षकों की कार्यशैली पर मढ़ देना।


प्राथमिक शिक्षा का यथार्थ: शिक्षक की गुणवत्ता या व्यवस्था का संकट? Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Primary ka school

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