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केस पुनः मंगलवार में लगाया जाए , अगले शुक्रवार तक सभी अपने सुझाव दें कि माननीय न्यायालय इस विवाद को सुलझाने हेतु कैसे अपनी असीम शक्ति (principle of natural justice under article 142) का प्रयोग कर सकें । समस्त वादी-प्रतिवादी आपसी सहमति देते हैं और अगर कोई रास्ता निकलता है तो ठीक है वरना केस को मेरिट पर सुलझाया जाएगा जिसके लिए डेट फिक्स की जाएगी ।
मेरा अपना मानना है ये कि अगर सरकार को मना ले जाओगे तो समस्त याचियों के प्रति कोर्ट उदार हो सकती है बाक़ी मेरिट डिमेरिट खेलोगे तो मामला फँसेगा ही क्योंकि सभी पक्ष जानते हैं कि सरकार अभी भी कोर्ट में मामले को फँसाकर रफ़ा दफ़ा करना चाह रही है ।
अगर समस्त याचियों की बात न हुई तो मेरिट पर लड़ा जाएगा और चयन सूची बाहर लानी ही होगी इसलिए सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाए का मार्ग अपनाइए , जो नौकरी कर रहे हैं वे भी खुश रहें और जिन्होंने वास्तविक लड़ाई लड़ी है उन्हें भी मिल जाये ।
