टीजीटी: अब हिंदी, संस्कृत की उत्तरकुंजी पर विवाद
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) 2022 अंग्रेजी में 33 गलत प्रश्नों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि इसी भर्ती के हिंदी और संस्कृत विषयों की उत्तरकुंजी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। दोनों विषयों के अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी अंतिम परिणाम को चुनौती दी है।
टीजीटी हिंदी में एक प्रश्न गलत पूछे जाने के खिलाफ ज्ञान सिंह समेत 28 अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। अभ्यर्थियों का दावा है कि जून में जारी उत्तरकुंजी में प्रश्न संख्या 44 के ‘पुनरुक्ति दोष’ का उत्तर आयोग के विशेषज्ञों ने गलत माना था। 28 जुलाई को जारी संशोधित उत्तरकुंजी में सही उत्तर ‘वाक्य दोष’ माना गया है।
अभ्यर्थियों ने एनसीईआरटी की किताब का हवाला देते हुए दावा किया कि पुनरुक्ति दोष ही सही उत्तर होना चाहिए। वहीं संस्कृत की उत्तरकुंजी को लेकर भी भुवनेश्वर प्रसाद पांडेय की ओर से याचिका दाखिल की गई है।
हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में चयन आयोग से जवाब मांगा है और निर्देश दिया है कि इस दौरान सीट आवंटन न किया जाए।
फाइलों और मुकदमों में फंसा चयन आयोग
चुनावी साल में ताबड़तोड़ परीक्षाएं कराने के साथ परिणाम दे रहे शिक्षा सेवा चयन आयोग की रफ्तार इन दिनों फाइलों और मुकदमों में सुस्त हो गई है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से 207 पद असिस्टेंट प्रोफेसर के भर्ती विज्ञापन इसलिए जारी नहीं हो रहे हैं क्योंकि विषयों की समकक्षता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इसी प्रकार टीजीटी, पीजीटी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के 23,899 पदों का विज्ञापन भी अर्हता को लेकर फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर बीएड और टीजीटी भर्ती के विवाद हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

