पुरानी अनियमितता के आधार पर बीस साल बाद आजीविका के साधन नहीं छीन सकते
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पुरानी अनियमितता के आधार पर दो दशक बाद बिना किसी शिकायत के राशन की दुकान चलाने वाले व्यक्ति की आजीविका मनमाने तरीके से नहीं छीनी जा सकती। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने राशन की दुकान का लाइसेंस निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने मोहम्मद राशिद की याचिका पर दिया है। आजमगढ़ निवासी याची के पक्ष में वर्ष 2005 में राशन की दुकान का लाइसेंस जारी किया गया था।
दो दशक से अधिक समय तक दुकान चलाने के दौरान राशन कार्डधारकों को खाद्यान्न व केरोसिन तेल के वितरण को लेकर उसके खिलाफ किसी शिकायत का रिकॉर्ड नहीं मिला। एक राजनीतिक व्यक्ति की शिकायत के बाद वर्ष 2026 में जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि लाइसेंस जारी होने के समय याची की उम्र 21 वर्ष से कम थी।
याची ने राशन की दुकान का लाइसेंस निरस्त किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसका कहना था कि बीस वर्ष से अधिक समय बाद इस आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वर्ष 2005 में याची उम्र संबंधी पात्रता पूरी नहीं करता था। हालांकि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि उसने अपनी उम्र को लेकर धोखाधड़ी या जालसाजी की थी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि राज्य 20 वर्ष से अधिक समय बाद इस आधार पर कार्रवाई करता है तो उस अधिकारी की जिम्मेदारी भी देखी जानी चाहिए, जिसने वर्ष 2005 में लाइसेंस जारी किया था। याची वर्तमान में उम्र के लिहाज से पात्र भी है।
वहीं, माहुल निवासी होने के समर्थन में वर्ष 2001 का मतदाता पहचान पत्र रिकॉर्ड में मौजूद था। हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका स्वीकार करते हुए 24 अप्रैल और 16 जुलाई 2026 के दोनों आदेश निरस्त कर दिए।
