UP Teacher News: शिक्षकों का वेतन काटना और Increment रोकना मानसिक उत्पीड़न नहीं, विधानसभा में सरकार का बड़ा जवाब
झांसी। उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के खिलाफ की जाने वाली वेतन संबंधी कार्रवाई को लेकर विधानसभा में महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के अनुसार शिक्षकों का वेतन काटना, वेतन वृद्धि (Increment) रोकना अथवा वेतन रोकना जैसी कार्रवाई को मानसिक उत्पीड़न नहीं माना जाएगा, यदि यह कार्रवाई निरीक्षण में अनियमितता या कमी पाए जाने पर सेवा नियमों के तहत की गई हो।
सरकार की ओर से यह जानकारी विधानसभा में गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई।
निरीक्षण में कमी मिलने पर कार्रवाई सेवा नियमों का हिस्सा
समाचार में बताया गया है कि सरकार ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान अनियमितता या कमी मिलने पर की जाने वाली कार्रवाई सेवा नियमों के तहत होती है। ऐसे मामलों में वेतन कटौती, वेतन वृद्धि रोकने या वेतन रोकने जैसी कार्रवाई को शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न नहीं माना जाएगा।
विधायक की ओर से शिक्षकों के उत्पीड़न से जुड़े मामलों की अलग से जांच कराने की मांग भी की गई थी, जिसे सरकार ने अस्वीकार कर दिया।
5 किलोमीटर में हाईस्कूल नहीं तो उच्चीकरण का प्रावधान
इसी दौरान माध्यमिक शिक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी भी विधानसभा में दी गई। माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी ने बताया कि जिन उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 5 किलोमीटर के दायरे में कोई हाईस्कूल नहीं है, उन्हें समग्र शिक्षा अभियान के दिशा-निर्देशों के अनुसार उच्चीकृत कर हाईस्कूल स्तर तक संचालित करने का प्रावधान है।
इसी प्रकार जिन हाईस्कूलों के 5 किलोमीटर के दायरे में इंटर कॉलेज नहीं है, उन्हें इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत करने की व्यवस्था है।
खबर की मुख्य बातें
वेतन काटना, वेतन रोकना या Increment रोकना अपने-आप में मानसिक उत्पीड़न नहीं माना जाएगा।
निरीक्षण में कमी या अनियमितता मिलने पर सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षकों के कथित उत्पीड़न के मामलों की अलग जांच कराने की मांग सरकार ने स्वीकार नहीं की।
5 किमी के दायरे में हाईस्कूल नहीं होने पर उच्च प्राथमिक विद्यालय के उच्चीकरण का प्रावधान।
5 किमी के दायरे में इंटर कॉलेज नहीं होने पर हाईस्कूल को इंटर स्तर तक उच्चीकृत करने की व्यवस्था।
