डिस्पैच और रिसीट रजिस्टर से खुलेगा गायब पत्रावलियों का राज, शिक्षामित्रों के चयन से जुड़ी पत्रावलियों के गायब होने में जाँच शुरू
मैनपुरी, बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षामित्रों के चयन से जुड़ी पत्रावलियों के गायब होने के पीछे का सच क्या है, ये तो पुलिस जांच से पता चलेगा। लेकिन विभाग में एक बड़ा सवाल यह चल रहा है कि आखिर 11 साल से एक बाबू मौखिक आदेश पर शिक्षामित्र के पटल सहायक के पद पर काम कैसे करता रहा? 2100 से अधिक चयन पत्रावलियां यदि वास्तव में गायब हैं, तो वे किन परिस्थितियों में गायब हुई और गायब नहीं है तो वे पत्रावलियां कहां हैं? सेवानिवृत्त पटल सहायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस इन पत्रावलियों की तलाश करेगी और रहस्य से पर्दा भी हटाएगी।
शिक्षा विभाग ने वर्ष 2006 में शिक्षामित्रों के पदों पर चयन किए गए थे। वर्ष 2008 में शिक्षामित्रों के पटल सहायक का काम तत्कालीन लिपिक विशुनदयाल राजपूत द्वारा देखा जा रहा था। विशुन दयाल को एंटी करप्शन आगरा की टीम ने वर्ष 2008 में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। विशुन दयाल के पकड़े जाने के बाद शिक्षामित्र चयन पटल सहायक का कार्य दूसरे लिपिक प्रदीप चौहान को सौंप दिया गया। प्रदीप चौहान का कहना है कि ये आदेश मौखिक मिला जबकि सच्चाई यह है कि तत्कालीन बीएसए ने यह काम उन्हें लिखित में सौंपा था। इसके बाद से लगातार वर्ष 2021 तक प्रदीप चौहान ने ही पटल सहायक का काम 11 साल लगातार किया। वर्ष 2021 के बाद यह काम धर्मेश बाबू को सौंप दिया गया। धर्मेश बाबू को शिक्षामित्रों के चयन से जुड़ी केवल 26 पत्रावलियां ही लिखित में सौंपी गई जबकि पत्रावलियों की कुल संख्या 2169 है, इनमें से 26 पत्रावलियों का रिकॉर्ड उपलब्ध है जबकि 2143 पत्रावलियां गायब हैं।
रविवार को भी पूरे दिन गायब रही पत्रावलियां: पत्रावलियां गायब हैं या साजिशन गायब की गई हैं, इसका खुलासा भी इस विवरण से हो जाएगा। विभाग में रविवार को भी पूरे दिन गायब पत्रावलियों का मामला छाया रहा। शिक्षा विभाग से जुड़े लोग इस पूरे मामले में असली सच्चाई जल्द सामने आने की बात कह रहे हैं। बीएसए सूर्य प्रताप सिंह का कहना है कि एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। पुलिस विवेचना में सभी तथ्य सामने आ जाएंगे।
एक दिन पूर्व कोतवाली में दर्ज हुआ केस
डीएम के निर्देश पर जांच के बाद बीएसए ने प्रदीप चौहान को गायब पत्रावलियों का जिम्मेदार मानकर कोतवाली में एक दिन पूर्व एफआईआर दर्ज करवा दी है। असल बात यह है कि पत्रावलियों के गायब होने के पीछे की सच्चाई विवेचना में भी तय होगी लेकिन 2010 से 2021 तक शिक्षामित्रों के पटल पर आई डिस्पैच और रिसीट पंजिका में अंकित 11 साल के विवरण की जांच कर ली जाए तो यह पता चल जाएगा कि इस पूरे मामले का असली सच क्या है?

