रिटायरमेंट के लिए बनाएं मजबूत फंड: EPF, VPF और NPS के इन 3 विकल्पों को समझकर ऐसे तैयार करें बड़ा कोष
आज की कमाई से केवल आज की जरूरतें पूरी नहीं की जा सकतीं। नौकरी के शुरुआती दिनों से ही नियमित बचत भविष्य में वित्तीय स्वतंत्रता का मुख्य आधार बन सकती है। युवावस्था से ही रिटायरमेंट के लिए अलग कोष तैयार करना समझदारी है, जिसके लिए ईपीएफ (EPF), वीपीएफ (VPF) और एनपीएस (NPS) जैसे विकल्प बेहद कारगर साबित हो सकते हैं।
1. ईपीएफ (EPF) - बचत का मूल आधार
योगदान: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) नौकरीपेशा लोगों के लिए अनिवार्य बचत योजना है। इसमें मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 12% हिस्सा कर्मचारी योगदान करता है, और नियोक्ता (Employer) भी 12% हिस्सा देता है। नियोक्ता के 12% में से 3.67% हिस्सा ईपीएफ खाते में और 8.33% हिस्सा पेंशन योजना (EPS) में जाता है।
ब्याज दर: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ पर सरकार द्वारा 8.25% ब्याज तय किया गया है।
2. वीपीएफ (VPF) - अतिरिक्त योगदान का मौका
फायदा: यदि कर्मचारी सामान्य ईपीएफ से अधिक बचत करना चाहते हैं, तो वे स्वैच्छिक भविष्य निधि (VPF) का विकल्प चुन सकते हैं। इसके जरिए कर्मचारी अपने मूल वेतन और डीए का 100% तक अतिरिक्त निवेश कर सकते हैं।
वीपीएफ खातों में भी वही ब्याज मिलता है जो सामान्य ईपीएफ खाते को मिलता है।
3. एनपीएस (NPS) - जोखिम के साथ ज्यादा रिटर्न
विशेषता: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) एक सेवानिवृत्ति कोष है, जो बाजार के जोखिमों से जुड़ा होता है। इसमें पैसा इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश होता है।
आंकड़ों के अनुसार, एनपीएस का संभावित रिटर्न लगभग 10% से 12% तक हो सकता है, जो ईपीएफ से अधिक है।
30 साल में कितना कोष बन सकता है? (उदाहरण: ₹25,000 मूल वेतन पर)
यदि केवल ईपीएफ + वीपीएफ चुना जाए:
कुल मासिक योगदान: ₹8,917.50 | 30 साल बाद कुल कोष: ₹2.32 करोड़
यदि ईपीएफ + एनपीएस चुना जाए:
कुल मासिक योगदान: ₹13,917.50 | 30 साल बाद कुल कोष: ₹1.74 करोड़
यदि तीनों विकल्प (ईपीएफ + वीपीएफ + एनपीएस) चुने जाएं:
कुल मासिक योगदान: ₹18,917.50 | 30 साल बाद कुल कोष: ₹2.53 करोड़
(नोट: यह गणना 8.25% ईपीएफ और 10% एनपीएस रिटर्न के अनुमानित आधार पर है.)
किन बातों का रखें ध्यान?
रिटायरमेंट लक्ष्य तय करें: अपनी उम्र, परिवार के मासिक खर्च (जैसे आज ₹50,000 है तो 20-25 साल बाद कितनी जरूरत होगी) को ध्यान में रखकर लक्ष्य तय करें।
नियमित निवेश की आदत: वेतन बढ़ने पर अतिरिक्त रकम खर्च करने के बजाय उसे रिटायरमेंट निवेश में बढ़ाना चाहिए।
कितनी मिलेगी पेंशन: रिटायरमेंट पर ईपीएफ की पूरी रकम बिना कर कटौती के मिलती है, जबकि एनपीएस की 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है और बाकी 40% रकम से एन्युटी (Annuity) खरीदनी होती है, जिसके आधार पर पेंशन तय होती है।

