आंसर-की को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (नागरिक पुलिस) और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती 2025 में लिखित परीक्षा की अंतिम आंसर-की को चुनौती देने वाली 22 याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने श्याम सुंदर व दो अन्य सहित कुल 22 याचिकाओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, प्रभाकर अवस्थी, अधिवक्ता आलोक मिश्र, संजय कुमार यादव, अतिप्रिया गौतम, राघवेंद्र मिश्र व अन्य अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, स्थायी अधिवक्ता राम स्वरूप उमराव व ब्रीफ होल्डर आकांक्षा मिश्रा को सुनकर दिया है।
मामले के तथ्यों के अनुसार भर्ती बोर्ड ने 12 अगस्त 2025 के विज्ञापन के तहत 4,543 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। 14 व 15 मार्च 2026 को लिखित परीक्षा हुई। 23 मार्च 2026 को प्रोविजनल आंसर-की जारी हुई और अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी गईं। बोर्ड ने 32 प्रश्नों को जांच के लिए चुना और विषय विशेषज्ञों से संदर्भ-स्रोतों सहित राय ली। इसके बाद सात मई 2026 को अंतिम आंसर-की और परीक्षा परिणाम जारी हुआ, जिसमें 12,333 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। दस्तावेज सत्यापन, शारीरिक मानक व शारीरिक दक्षता परीक्षा के बाद 14 जुलाई 2026 को अंतिम परिणाम घोषित हुआ, जिसमें याचियों के नाम सफल अभ्यर्थियों में नहीं थे। याचियों की ओर से कहा गया कि कुछ प्रश्नों के सही उत्तर पर हाईकोर्ट की खंडपीठ पहले अन्य भर्तियों में अंतिम निर्णय दे चुकी है इसलिए वही उत्तर सही माना जाए। जिन अभ्यर्थियों के उत्तर प्रोविजनल आंसर-की में सही थे, उन्हें आपत्ति का मौका ही नहीं मिला। अंतिम आंसर-की में बोर्ड ने कुछ उत्तर बदल दिए, पर उसके बाद आपत्ति का कोई अवसर नहीं दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि डिवीजन बेंच के फैसले भी उसी कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की राय पर आधारित थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि बोर्ड के जवाबी हलफनामे का जवाब दाखिल करने का अवसर दिए जाने पर सभी याचियों की ओर से कहा कि रिज्वाइंडर दाखिल नहीं करना चाहते।
साथ ही, कोर्ट के सीधे सवाल पर भी कोई बोर्ड पर दुर्भावना, पक्षपात या अनुचित साधन अपनाने का आरोप नहीं लगा सका।
कोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रश्न पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है और कोई भी राय अंतिम नहीं कही जा सकती। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाला बोर्ड ही सभी विशेषज्ञ राय पर विचार कर उत्तर की शुद्धता तय करेगा, जो इस मामले में किया गया इसलिए कोर्ट ने किसी विशेष प्रश्न के उत्तर की सत्यता में गए बिना ही प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं पाई। अंतिम आंसर-की पर दोबारा आपत्ति का अवसर न देने की दलील को कोर्ट ने पूरी तरह निराधार बताया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा अवसर देने पर प्रक्रिया अंतहीन हो जाएगी और परिणाम कभी अंतिम नहीं हो सकेगा क्योंकि हर आंसर-की पर आपत्तियां आती ही हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद पूर्व में नियुक्ति पत्र जारी करने पर लगी रोक को समाप्त कर दिया।
