कुछ अलग: बेईमान बेटी से जीता पिता मगर मरने के बाद
नई दिल्ली। पांच बेटियों के पालन-पोषण से लेकर उनके विवाह तक की हर जिम्मेदारी निभाने वाला पिता 83 साल की उम्र में अपनी ही एक बेटी के हाथों धोखाधड़ी का शिकार हुआ। इस अन्याय के खिलाफ उन्होंनेे कानूनी लड़ाई लड़ी और जीती भी मगर पूरा न्याय मौत के बाद मिल पाया।
दिल्ली के रहने वाले रामसरूप ने 2006 में पांचों बेटियों को संपति में हिस्सा देने के लिए वसीयत बनवाने का निर्णय किया। उन्होंने सबसे छोटी बेटी पर भरोसा कर उसे इस काम में मदद के लिए कहा। बेटी ने पिता के कम पढ़े-लिखे होने का फायदा उठाया और वसीयत की बजाय अपने नाम अंग्रेजी में लिखी सेल डीड बनवाकर पिता से हस्ताक्षर करवा लिए। रामसरूप ने कई बार वसीयत के कागजात मांगे मगर बेटी टालमटोल करती रही। 2013 में पिता ने दूसरी बेटियों के माध्यम से सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से कॉपी निकलवाई, तो उन्हें धोखाधड़ी का पता चला। रामसरूप ने पुलिस को शिकायत दी, नई वसीयत बनवाकर सबसे छोटी बेटी को संपति से बेदखल कर दिया। 2016 में 93 साल की उम्र में रामसरूप की मृत्यु हो गई तो चार बेटियों ने इसे आगे बढ़ाया। अदालत से फैसला आ गया मगर बेटी ने घर खाली नहीं किया। अब हाईकोर्ट ने घर खाली करने और अन्य चारों बेटियों को कब्जे का आदेश दिया है।
एक लाख में पूरा मकान
अदालत ने माना कि जिस मकान की बात यहां हो रही है। वर्ष 2006 में उसकी कीमत 60 लाख रुपये थी, जबकि बेटी ने दावा किया कि उसने एक लाख रुपये पिता को देकर यह मकान खरीदा है। ऐसा कैसे संभव हो सकता है।

