विशेष टीईटी का कठिन प्रश्नपत्र देख छूटे शिक्षकों के पसीने, गणित और पर्यावरण के सवालों ने बढ़ाई मुश्किल
शिक्षक संगठनों ने परीक्षा के स्तर की समीक्षा कराने की उठाई मांग, 50 से 55 वर्ष तक के शिक्षकों को भी कठिन सवालों से हुई परेशानी
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में वर्ष 2010 एवं उससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को आयोजित विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (Special TET) का प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। परीक्षा में गणित, पर्यावरण, बाल मनोविज्ञान और अंग्रेजी विषयों के प्रश्नों ने शिक्षकों को खासा उलझाया। परीक्षा देकर बाहर निकले कई शिक्षकों ने प्रश्नपत्र के स्तर को लेकर असंतोष जताया।
गणित और पर्यावरण के सवालों ने बढ़ाई परेशानी
परीक्षा में शामिल शिक्षकों के अनुसार प्रश्नपत्र का स्तर अपेक्षा से अधिक कठिन रहा। विशेष रूप से गणित, पर्यावरण अध्ययन, बाल मनोविज्ञान और अंग्रेजी के प्रश्नों ने अभ्यर्थियों को काफी परेशान किया। लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के लिए भी कई सवाल चुनौतीपूर्ण साबित हुए।
शिक्षकों का कहना है कि विशेष टीईटी का उद्देश्य निर्धारित पात्रता संबंधी शर्तों को पूरा करना है, लेकिन प्रश्नपत्र का कठिन स्तर कई अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का कारण बना।
शिक्षक संगठनों ने परीक्षा की समीक्षा कराने की मांग उठाई
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि विशेष टीईटी के प्रश्नपत्र की शासन स्तर पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अन्य विभागीय परीक्षाओं में कर्मचारियों की सेवा अवधि और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। विशेष टीईटी में भी इसी तरह का दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए था।
एसोसिएशन के महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि शिक्षक परीक्षा देने से पीछे नहीं हट रहे हैं, लेकिन परीक्षा के नाम पर उनके भविष्य और सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की परिस्थितियों के अनुरूप परीक्षा का स्तर निर्धारित किया जाना चाहिए।
50 से 55 वर्ष तक के शिक्षक भी हुए शामिल
शिक्षक संगठनों के मुताबिक परीक्षा में 50 से 55 वर्ष तक की आयु के शिक्षक भी शामिल हुए। ऐसे में प्रश्नों का कठिन और उलझाऊ होना चिंता का विषय है। संगठनों ने शासन से मांग की है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र और उसके कठिनाई स्तर की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए।
1.06 लाख शिक्षकों ने किया था आवेदन
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी का आयोजन किया गया। इसके लिए प्रदेश में लगभग 1.06 लाख शिक्षकों ने आवेदन किया था।
शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि सामान्य टीईटी की तरह इस परीक्षा में भी करीब 80 प्रतिशत शिक्षक सफल होंगे। हालांकि, परीक्षा के प्रश्नपत्र को लेकर सामने आई कठिनाई और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं के बाद अब परिणाम को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है।
निष्कर्ष: विशेष टीईटी के कठिन प्रश्नपत्र ने एक बार फिर परीक्षा के उद्देश्य, प्रश्नों के स्तर और लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर बहस छेड़ दी है। अब शिक्षक संगठनों की मांग है कि शासन प्रश्नपत्र की समीक्षा कर शिक्षकों के हित में उचित निर्णय ले।

