TGT भर्ती 2026: स्नातक में 50% अंकों की अनिवार्यता खत्म करने की मांग, आयोग को ज्ञापन
17,735 पदों की टीजीटी भर्ती के विज्ञापन में बदलाव से अभ्यर्थियों की बढ़ी मुश्किलें, स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता खत्म करने की मांग तेज
प्रयागराज। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) के 17,735 पदों पर भर्ती के विज्ञापन में बदलाव के बाद अभ्यर्थियों के सामने नई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। खासकर बीएड डिग्रीधारक अभ्यर्थी नए भर्ती नियमों और विषयवार अर्हता को लेकर असमंजस में हैं। इस मामले में युवा मंच ने शिक्षा सेवा चयन आयोग का ध्यान आकर्षित करते हुए स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की है।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने आयोग के अध्यक्ष और सचिव को मांगपत्र भेजकर भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को राहत देने की अपील की है।
स्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
युवा मंच की ओर से दिए गए मांगपत्र में कहा गया है कि एनसीटीई के नियमों में बीएड डिग्री की अनिवार्यता का प्रावधान नहीं है और अभ्यर्थियों को स्कूल विषय के लिए आवेदन करने का अवसर दिया जाना चाहिए। संगठन ने अंग्रेजी विषय में स्नातक और भाषा संबंधी अर्हता को लेकर उत्पन्न विवाद को भी दूर करने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि भर्ती की अर्हता निर्धारित करते समय समानता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे योग्य अभ्यर्थी केवल अंकों की अनिवार्यता के कारण अवसर से वंचित न हों।
बीएड अभ्यर्थियों ने भी सौंपा ज्ञापन
प्रयागराज में बीएफए के छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को शिक्षा निदेशालय में एकत्र होकर नई टीजीटी भर्ती में बिना बीएड वाले बीएफए अभ्यर्थियों को शामिल करने की मांग की।
अभ्यर्थियों ने अपने ज्ञापन में कहा कि उन्होंने चार वर्षीय स्नातक और दो वर्षीय परास्नातक पाठ्यक्रम पूरा किया है। उनका पाठ्यक्रम ललित कला के अंतर्गत विशिष्ट कला का है, जो प्राविधिक कला से अलग है और व्यावसायिक पाठ्यक्रम में शामिल है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि नए विज्ञापन में बीएफए डिग्रीधारकों को अवसर नहीं मिला, जबकि वर्ष 2021 और 2022 की कला विषय की भर्तियों में बिना बीएड अभ्यर्थियों को भी अवसर दिया गया था।
अन्य मांगें भी उठाई गईं
ज्ञापन में अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में समानता और स्पष्टता सुनिश्चित करने के साथ कुछ अन्य मांगें भी रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता समाप्त करना।
बीएफए डिग्रीधारकों को उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुसार अवसर देना।
अंग्रेजी विषय में स्नातक और भाषा संबंधी विवाद दूर करना।
बीएड की अनिवार्यता एवं विषयवार अर्हता को स्पष्ट करना।
प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक पदों पर वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को अनुभव का लाभ देना।
इंटरमीडिएट में विषयों की अर्हता संबंधी नियमों में स्पष्टता लाना।
भूतपूर्व सैनिकों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और दिव्यांग अभ्यर्थियों को नियमानुसार आरक्षण एवं भारांक देना।
स्नातक और परास्नातक में एक ही विषय की निरंतरता की शर्त समाप्त करना।
भर्ती विज्ञापन में संशोधन की मांग तेज
17,735 पदों की टीजीटी भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग सभी विषयों की अर्हता और शैक्षिक योग्यता संबंधी नियमों की समीक्षा करे। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अभ्यर्थियों की इन मांगों पर क्या निर्णय लेता है और भर्ती विज्ञापन में संशोधन को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
