UP Teachers News: बोर्ड परीक्षा, जनगणना प्रशिक्षण और विशेष टीईटी के बीच शिक्षकों की बढ़ी मुश्किलें
विशेष टीईटी के कठिन पेपर के बाद शिक्षक संगठनों में नाराजगी, अब जनगणना ड्यूटी से माध्यमिक शिक्षकों को मुक्त रखने की उठी मांग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के सामने इन दिनों दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर पाठ्यक्रम समय से पूरा कराने का दबाव बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जनगणना कार्य के लिए प्रशिक्षण और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी सौंपी जा रही हैं। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने माध्यमिक शिक्षकों को जनगणना सहित गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत देने की मांग तेज कर दी है।
### बोर्ड परीक्षा से पहले कोर्स पूरा कराने का दबाव
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पांच फरवरी से बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी कर दिया है। हाल ही में मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने यूट्यूब सत्र के माध्यम से शिक्षकों को जल्द से जल्द पाठ्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए थे। विभाग का जोर है कि निर्धारित शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई पूरी कराई जाए, ताकि विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
लेकिन दूसरी ओर शिक्षकों को जनगणना प्रशिक्षण, चुनाव ड्यूटी और अन्य विभागीय कार्यों में भी लगाया जा रहा है। इससे विद्यालयों में नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका है।
### जनगणना ड्यूटी से शिक्षकों को मुक्त करने की मांग
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने शिक्षकों को शिक्षण कार्य से इतर अन्य जिम्मेदारियों से मुक्त रखने की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी, जनगणना कार्य और बाह्य परीक्षा जैसी जिम्मेदारियों में लगाने से पढ़ाई प्रभावित होती है।
संघ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग की है।
### विशेष टीईटी के कठिन पेपर पर भी नाराजगी
इसी बीच मंगलवार को आयोजित विशेष टीईटी परीक्षा को लेकर भी शिक्षक संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। परीक्षा में शामिल शिक्षकों का कहना है कि पेपर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तुलना में काफी कठिन था। गणित, पर्यावरण, बाल मनोविज्ञान और अंग्रेजी के सवालों का स्तर काफी ऊंचा था।
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष तिवारी ने विशेष टीईटी परीक्षा की शासन स्तर पर समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा में शामिल शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्र तैयार किया जाना चाहिए था।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि 50 से 55 वर्ष की आयु के शिक्षक भी इस परीक्षा में शामिल हुए। ऐसे में परीक्षा के नाम पर शिक्षकों के भविष्य और सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
### शिक्षकों पर बढ़ता गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ
शिक्षक संगठनों का कहना है कि एक ओर सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समय से पाठ्यक्रम पूरा कराने की अपेक्षा करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है।
जनगणना से पहले दो-दो चरणों में प्रशिक्षण कराया जा रहा है। इसके बाद शिक्षकों को जनगणना कार्य में विद्यालयों से दूर भेजे जाने की तैयारी है। ऐसे में बोर्ड परीक्षा से पहले शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग है कि बोर्ड परीक्षा तक शिक्षकों को शिक्षण कार्य पर ध्यान केंद्रित करने दिया जाए तथा जनगणना और अन्य गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
