सूरतेहाल : सर्वोदय स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पद मिला वेतन नहीं
लखनऊ, । समाज कल्याण विभाग के आधीन संचालित आश्रम पद्धति जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के प्रवक्ताओं के नियम विरुद्ध हुए पदोन्नति का मामला फंस गया है। शासन ने प्रवक्ता से सीधे प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत किए गए शिक्षकों को पदनाम तो दे दिया लेकिन ग्रेड पे (वेतन) नहीं दिया। पूर्व में हुई डीपीसी की बैठक में लिए गए निर्णय रद्द कर दिया है। प्रभावित शिक्षक और शासन दोनों सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। प्रदेश में सचालित 101 जय प्रकाश नरायण सर्वोदय विद्यालयों आयोग से प्रवक्ता पद पर भर्ती हुई थी। प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के लिए 10 वर्ष की सेवा नियमावली तथा बीच में समयबद्ध वेतनमान भी दिया जाना जरूरी है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में करीब 100 प्रवक्ताओं को डीपीसी के बाद प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत कर दिया गया। मामला शासन के संज्ञान में आने के बाद शासन सक्रिय हुआ और डीपीसी में लिए गए फैसले निरस्त कर दिए।
प्रभावित शिक्षकों ने हाईकोर्ट शासन के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला दिया। इससे पहले नवंबर 2023 में वित्त विभाग के साथ हुई बैठक में तय किया गया था कि प्रवक्ता और प्रधानाचार्य के बीच उप प्रधानाचार्य का पद सृजित किया जाए। वेतनमान 4800 और 7600 के बीच दो ग्रेड पे (5400 और 6600) और होते हैं। इसके बाद भी पदोन्नति का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया गया। शासन ने आपत्ति जताई कि सीधे 7600 का ग्रेड पे कैसे दिया जा सकता है।
उधर, हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रधानाचार्य पद पदनाम तो दे दिया गया लेकन 7600 ग्रेड पे नहीं दिया गया। प्रभावित शिक्षक और शासन दोनों सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे हैं। शासन के सूत्रों का कहना है कि डीपीसी में नियम विरुद्ध प्रमोशन हुए थे। कई तो तय सेवा शर्तें भी नहीं पूरी करते थे। कुछ को पांच वर्ष की सेवा में ही पदोन्नत कर दिया गया था। कैसे दो ग्रेड पे को दरकिनार कर अधिकतम ग्रेड पे 7600 दिया जा सकता है। पदोन्नति का मामला फंसने के बाद शासन ने उप प्रधानाचार्य पद सृजित कर दिया है। इसका ग्रेड पे 5400 है और इसी हिसाब से वेतन भुगतान भी किया जा रहा है।

