अंकपत्र में 14 साल की छात्रा को दिखाया 94 साल का, 11 साल बाद हुआ सुधार
प्रयागराज/वाराणसी: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) से जारी अंकपत्र में हुई एक गंभीर गलती के कारण हाईस्कूल की 14 वर्षीय छात्रा को 94 वर्ष की दिखा दिया गया। छात्रा की जन्मतिथि अंकपत्र में गलत दर्ज होने का मामला सामने आने के बाद लंबे समय तक सुधार नहीं हो सका। आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 11 साल बाद जन्मतिथि में सुधार किया गया।
20 मई 2000 की जगह दर्ज हुई 20 मई 1920
मामला जौनपुर की छात्रा जया से जुड़ा है। श्री रामलखन सिंह शिक्षण संस्थान, नकरा खानदेव, जौनपुर की संस्थागत छात्रा जया ने वर्ष 2014 में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद अंकपत्र में उनकी जन्मतिथि 20 मई 1920 दर्ज थी, जबकि उनकी वास्तविक जन्मतिथि 20 मई 2000 थी।
इस गलती के कारण अंकपत्र में छात्रा की उम्र 14 वर्ष के बजाय 94 वर्ष दिखाई गई।
समय सीमा के कारण बोर्ड ने किया था आवेदन खारिज
नियमों के अनुसार जन्मतिथि में संशोधन के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना आवश्यक होता है। छात्रा की ओर से वर्ष 2018 में आवेदन किया गया, लेकिन तब तक निर्धारित समय सीमा बीत चुकी थी।
इसी आधार पर यूपी बोर्ड ने मामले को कालबाधित मानते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया।
हाईकोर्ट पहुंची छात्रा
बोर्ड के फैसले के बाद जया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली। न्यायालय के आदेश के बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद मुख्यालय, प्रयागराज और वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय ने मामले का परीक्षण किया।
जांच के बाद यूपी बोर्ड के वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव भास्कर मिश्र ने बताया कि नियमों के तहत परीक्षण करने के बाद छात्रा की जन्मतिथि में सुधार कर दिया गया है।
11 साल बाद मिली सही जन्मतिथि
लंबी कानूनी प्रक्रिया और विभागीय परीक्षण के बाद अब छात्रा के अंकपत्र में गलत दर्ज जन्मतिथि को सही कर दिया गया है। इस मामले ने एक बार फिर शैक्षिक अभिलेखों में दर्ज जन्मतिथि की जांच और समय रहते संशोधन कराने के महत्व को सामने ला दिया है।
जरूरी बात: विद्यार्थियों और अभिभावकों को बोर्ड परीक्षा के फॉर्म, प्रवेश पत्र और अंकपत्र में नाम, माता-पिता का नाम व जन्मतिथि की जानकारी ध्यान से जांच लेनी चाहिए। किसी भी गलती की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया और समय सीमा के भीतर सुधार के लिए आवेदन करना बेहतर होता है।
