हिमालय के नीचे तेज हलचल से भूकंप का खतरा बढ़ा, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता
Himalayan Earthquake Risk: हिमालयी क्षेत्र में भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार टक्कर के कारण जमीन के नीचे भूगर्भीय हलचल बनी हुई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय प्लेट हर साल लगभग 5 सेंटीमीटर की गति से उत्तर की ओर बढ़ रही है, जिसके कारण हिमालय के नीचे लगातार ऊर्जा जमा हो रही है।
100 किलोमीटर गहराई तक पहुंच रही भारतीय प्लेट
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराते हुए तिब्बत के नीचे लगभग 100 किलोमीटर की गहराई तक पहुंच चुकी है। इस प्लेट की लगातार गति और टक्कर के कारण हिमालय के नीचे की भू-संरचना में तनाव बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रक्रिया के कारण धरती के भीतर ऊर्जा जमा होती रहती है। जब यह ऊर्जा किसी फॉल्ट या कमजोर भूगर्भीय क्षेत्र में अचानक रिलीज होती है, तो भूकंप के झटके महसूस हो सकते हैं।
35 से 70 किलोमीटर मोटी है भूपर्पटी
रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तरी भारत में पृथ्वी की भूपर्पटी की मोटाई करीब 35 किलोमीटर से बढ़कर तिब्बत के नीचे लगभग 70 किलोमीटर तक हो जाती है। हिमालय क्षेत्र में आने वाले अधिकांश भूकंप अपेक्षाकृत कम गहराई पर दर्ज किए जाते हैं, जिससे इस क्षेत्र की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।
हिमालय में लगातार बन रहा दबाव
भारतीय प्लेट की उत्तर दिशा में लगातार गति के कारण हिमालय का निर्माण आज भी जारी है। प्लेटों की इस टक्कर से चट्टानों और फॉल्ट सिस्टम में तनाव पैदा होता रहता है। कई स्थानों पर यह तनाव लंबे समय तक जमा हो सकता है।
भू-विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, किसी विशेष तारीख या समय पर भूकंप आने की भविष्यवाणी करना संभव नहीं है। ऐसे अध्ययनों का उद्देश्य हिमालय के नीचे मौजूद फॉल्ट सिस्टम, भूगर्भीय संरचना और संभावित जोखिम को बेहतर तरीके से समझना है।
हिमालयी राज्यों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी
हिमालयी क्षेत्र में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम और पूर्वोत्तर के कई इलाके भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का जोर भूकंप-रोधी निर्माण, बेहतर भवन मानकों, आपदा तैयारी और जन-जागरूकता पर रहता है।
महत्वपूर्ण बात: इस वैज्ञानिक अध्ययन का अर्थ यह नहीं है कि किसी निश्चित तारीख को बड़ा भूकंप आने वाला है। यह हिमालय के नीचे लंबे समय से चल रही प्लेटों की गतिविधि और उससे पैदा होने वाले भूगर्भीय तनाव को समझने से जुड़ा अध्ययन है।

