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Tuesday, October 13, 2026

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981: वरिष्ठता निर्धारण pdf फाइल यहाँ से करें डाउनलोड

 उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981

UP Teacher Promotion 2026: वरिष्ठता सूची निर्धारण के नियम, समान नियुक्ति तिथि होने पर किसे मिलेगी वरीयता?

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पदोन्नति के लिए वरिष्ठता सूची तैयार करने में मौलिक नियुक्ति तिथि, चयन सूची का क्रम और सेवा नियमावली के प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। समान तारीख को नियुक्त शिक्षकों की वरिष्ठता कैसे निर्धारित होगी? जानिए नियम 16, 17, 18 और 22 के आधार पर पूरी जानकारी।


1. नियम 22: वरिष्ठता निर्धारण का मुख्य आधार

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 के नियम 22 के अनुसार, किसी संवर्ग में अध्यापक की ज्येष्ठता सामान्यतः उसकी मौलिक नियुक्ति की तारीख से निर्धारित की जाती है।


यदि दो या अधिक अध्यापक एक ही तारीख को नियुक्त किए गए हों, तो उनकी ज्येष्ठता उस क्रम से निर्धारित की जाएगी, जिस क्रम में उनके नाम नियम 17 या नियम 18 के अंतर्गत तैयार संबंधित सूची में आए हों।


इसका अर्थ है कि समान मौलिक नियुक्ति तिथि होने पर केवल उम्र या नाम के आधार पर वरिष्ठता तय नहीं की जा सकती। संबंधित नियम के अंतर्गत निर्धारित सूची का क्रम महत्वपूर्ण हो सकता है।


2. नियम 16: चयन समिति का गठन

नियम 16 में चयन समिति के गठन का प्रावधान है। आपके साझा किए गए विवरण के अनुसार, इसमें प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान; जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा अन्य निर्धारित अधिकारी शामिल हैं।


चयन समिति की संरचना और सदस्यों की भूमिका संबंधित नियमावली के मूल पाठ के अनुसार देखी जानी चाहिए।


3. नियम 17: चयन सूची का महत्व

नियम 17 सीधी भर्ती की प्रक्रिया और चयन सूची तैयार करने से संबंधित है। साझा की गई पोस्ट में यह उल्लेख किया गया है कि यदि दो या अधिक अभ्यर्थियों के गुणवत्ता अंक समान हों, तो अधिक आयु वाले अभ्यर्थी को सूची में ऊपर रखा जाता है।


यह प्रावधान चयन प्रक्रिया में सूची का क्रम निर्धारित करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसे प्रत्येक पदोन्नति मामले पर सीधे लागू नहीं किया जाना चाहिए। यह देखना आवश्यक है कि संबंधित मामला सीधी भर्ती की सूची से जुड़ा है या पदोन्नति की सूची से।


4. नियम 18: पदोन्नति द्वारा भर्ती की प्रक्रिया

नियम 18 के अनुसार, संबंधित पद पर पदोन्नति निर्धारित प्रक्रिया से की जाती है। इसमें वरिष्ठता के आधार पर पात्र अभ्यर्थियों पर विचार करने का प्रावधान है, जिसमें अनुपयुक्त अभ्यर्थी को अस्वीकार करने की व्यवस्था भी शामिल है।


नियुक्ति प्राधिकारी पात्र अभ्यर्थियों की सूची वरिष्ठता क्रम में तैयार करता है। संबंधित चरित्र पंजियों और अन्य अभिलेखों के आधार पर चयन समिति अभ्यर्थियों के मामलों पर विचार करती है और चयनित अभ्यर्थियों की सूची वरिष्ठता क्रम में अग्रसारित करती है।


इसलिए पदोन्नति में केवल नियुक्ति तिथि देखना पर्याप्त नहीं हो सकता; पात्रता और संबंधित अभिलेख भी महत्वपूर्ण हैं।


5. समान मौलिक नियुक्ति तिथि होने पर क्या होगा?

ऐसी स्थिति में निम्नलिखित बिंदुओं की जांच की जानी चाहिए:


दोनों अध्यापकों की मौलिक नियुक्ति तिथि समान है या नहीं।


दोनों की नियुक्ति किस भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत हुई थी।


संबंधित नियमों के अनुसार कौन-सी सूची वरिष्ठता निर्धारण के लिए लागू होती है।


सूची में दोनों का क्रम क्या है।


क्या कोई विशेष न्यायिक आदेश या विभागीय निर्देश उस मामले पर लागू होता है।


यदि दोनों अध्यापकों की नियुक्ति अलग-अलग भर्ती प्रक्रियाओं के अंतर्गत हुई है, तो केवल यह मान लेना उचित नहीं होगा कि पुरानी चयन सूची में अधिक ऊपर नाम होने से पदोन्नति की वरिष्ठता स्वतः निर्धारित हो जाएगी। संबंधित संवर्ग और लागू नियमों का परीक्षण आवश्यक है।


6. स्थानांतरण के बाद वरिष्ठता

नियम 22 के उपनियम (2) में एक स्थानीय क्षेत्र से दूसरे स्थानीय क्षेत्र में स्थानांतरित अध्यापक की वरिष्ठता के संबंध में विशेष प्रावधान है। संबंधित नियम की शर्तों के अनुसार, स्थानांतरित अध्यापक का नाम नए स्थानीय क्षेत्र की संबंधित सूची में सबसे नीचे रखा जा सकता है।


इस प्रावधान को लागू करने से पहले स्थानांतरण का प्रकार, संबंधित संवर्ग और लागू नियमों की जांच आवश्यक है।


 उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद में पदोन्नति के लिए वरिष्ठता निर्धारित करते समय नियम 22 का विशेष महत्व है। सामान्य स्थिति में मौलिक नियुक्ति तिथि आधार होती है, जबकि समान नियुक्ति तिथि होने पर संबंधित नियम के अनुसार सूची का क्रम निर्णायक हो सकता है।

महत्वपूर्ण: यह विश्लेषण आपके द्वारा साझा की गई नियमावली और वरिष्ठता संबंधी पोस्ट पर आधारित है। किसी वास्तविक वरिष्ठता विवाद में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले लागू संशोधनों, संबंधित विभागीय आदेशों और मामले पर लागू न्यायालय के निर्णयों का परीक्षण करना जरूरी है।


पूरी pdf फाइल यहाँ से करें डाउनलोड 

https://drive.google.com/file/d/1Fskja3jMsh99L1xuaS6orJMr514gynOs/view?usp=sharing

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