इंटरनेट पर टीवी चैनल के लिए ऐप को मंजूरी जरूरी
इंटरनेट के माध्यम से सीधे टीवी चैनल दिखाने वाले ऐप्स और मुफ्त विज्ञापन-आधारित स्ट्रीमिंग मंचों (फास्ट सर्विस) को नियमित करने की तैयारी है। इसके लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने नए नियामकीय ढांचे की सिफारिश जारी की है। इसके तहत अब इंटरनेट पर तय समय-सारिणी के अनुसार टीवी चैनल दिखाने वाले सभी ऐप्स को सरकार से आधिकारिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
ट्राई ने सोमवार को एप्लिकेशन आधारित टीवी वितरण मंचों (एएलटीडी) के लिए प्राधिकरण ढांचे से जुड़ी सिफारिशें जारी की। प्रस्ताव के मुताबिक, एएलटीडी सेवा देने वाली कंपनी को केंद्र सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए आवेदन शुल्क 10,000 रुपये और एकमुश्त प्रवेश शुल्क एक लाख रुपये रखा गया है। अनुमति की शुरुआती अवधि 20 साल होगी और इसके बाद 10-10 साल के लिए नवीनीकरण किया जा सकेगा।
टीवी और मोबाइल ऐप भी दायरे में : ट्राई का कहना है कि कई ऐप स्मार्ट टीवी, मोबाइल फोन और अन्य इंटरनेट से जुड़े उपकरणों पर तय कार्यक्रम के अनुसार पारंपरिक टीवी की तरह टीवी चैनल दिखाते हैं। कुछ ऐप टीवी में पहले से इंस्टाल होते हैं, जबकि कुछ को डाउनलोड करना पड़ता है। वेबसाइट के जरिए भी ऐसी सेवाएं मिलती हैं। ट्राई ने उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए ऐप प्रदाता को मुख्य जिम्मेदार बनाने की सिफारिश की है। इसका मतलब है कि सेवा से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं के निपटारे के लिए उपभोक्ता संबंधित ऐप प्रदाता से संपर्क कर सकेंगे।
टीवी निर्माता कंपनियां केवल अधिकृत ऐप मुहैया कराएंगी
प्रस्ताव के अनुसार, स्मार्ट टीवी बनाने वाली कंपनियों और ऑपरेटिंग सिस्टम प्रदाताओं (जैसे एंड्रॉयड या वेबओएस) पर अब केवल प्रामाणिक ऐप्स ही उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होगी। उन्हें हर साल मंत्रालय को अनुपालन रिपोर्ट भी देनी होगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सभी स्वीकृत एएलटीडी ऐप्स की एक केंद्रीय सूची बनाएगा। इसके साथ ही, इंटरनेट ऐप्स केवल उन्हीं टीवी चैनलों का प्रसारण कर पाएंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से वैध मंजूरी या पंजीकरण प्राप्त है।
