पहल: सौ प्रतिशत एथेनॉल वाले ईंधन को केंद्र सरकार की मंजूरी, संशोधन की अधिसूचना जारी
केंद्र सरकार ने सौ फीसदी एथेनॉल (ई-100) वाले ईंधन को मंजूरी दे दी है। इस ईंधन को सिर्फ उन्हीं गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिन्हें खासतौर पर ई-100 फ्यूल से चलने के लिए बनाया हो। नए नियमों से ऐसी कारों की टेस्टिंग और उन्हें चलाने की मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।केंद्र ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम-1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इसके अनुसार, केंद्र ने फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए निर्धारित उत्सर्जन मानकों में ई-85 के साथ ई-100 को शामिल किया है।
सड़क परिवहन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ई-20 से अधिक और ई-100 तक के ईंधन का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें इसके लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया है। यह नियम अन्य वाहनों पर लागू नहीं होगा। ई-20 या सामान्य पेट्रोल से चलने वाले वाहन ई-85 या ई-100 ईंधन का इस्तेमाल नहीं कर सकते। सरकार ने पेट्रोल और डीजल से चलने वाले हल्के वाहनों के लिए वजन की सीमा तीन हजार से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दी है। सरकार कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही। ई-20 की शुरुआत पहले हो चुकी है। वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने इस साल जून में देश का पहला फ्लेक्स-फ्यूल यात्री वाहन पेश किया था। ई-100 ईंधन का इस्तेमाल उन्हीं वाहनों में होगा जो इसके अनुसार बने हैं।
ई-20 या सामान्य पेट्रोल से चलने वाले वाहनों में ई-85 और ई-100 ईंधन का इस्तेमाल नहीं होगा।
तो आइए जानते हैं ई-100 से जुड़े जरूरी सवालों का जवाब जिनको जानना जरूरी है। यह कैसे बनता है और इसका क्या असर होगा-
क्या हैं फ्लेक्स-फ्यूल वाहन
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को ई-85 (85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल) जबकि ई-100 (लगभग 100 फीसदी एथेनॉल) जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर चलने के लिए बनाया जाता है।
इसके विपरीत, सामान्य पेट्रोल वाहनों को कम मात्रा में एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी जाती है।
ई-100 ईंधन के इस्तेमाल से क्या लाभ होगा
ई-100 के इसके इस्तेमाल से गाड़ियों से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन में भारी कमी आएगी। एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी। एथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
● क्या होता है ई-100 ईंधन और कैसे बनता है?
ई-100 100 फीसदी शुद्ध एथेनॉल ईंधन है। एथेनॉल मुख्य रूप से पौधों, गन्ना और मक्का से तैयार किया जाने वाला एक बायोफ्यूल है। इसमें पेट्रोल नहीं मिलाया जाता है। ईंधन इस तरह से तैयार किया जाता है कि वाहन के इंजन को कोई नुकसान नहीं होता है।
● नए नियम का मौजूदा कार मालिकों पर क्या असर होगा?
ई-100 ईंधन की उपलब्धता से मौजूदा कार मालिकों को अपने वाहनों में बदलाव करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, सामान्य पेट्रोल कार में ई-100 डालने से पहले निर्माता की सलाह और इंजन की अनुकूलता जांचना जरूरी है।
● फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक क्या है और कैसे काम करती है?
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियां पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण से चल सकती हैं। इनमें इंजन और इसे ऐसे डिजाइन किया जाता है कि वे ईंधन के अनुपात के अनुसार काम कर सकें। ई-100 के लिए विशेष अनुकूलता जरूरी है।
● दुनिया में और कहां फ्लेक्स-फ्यूल इस्तेमाल हो रहा?
अमेरिका और ब्राजील में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का व्यापक इस्तेमाल होता है। ब्राजील में एथेनॉल आधारित ईंधन खासा लोकप्रिय है।
● एथेनॉल के लिए क्या इंजन में बदलाव होता है?
ईंधन पंप, पाइप, सील और इंजेक्टर जैसे पुर्जों को एथेनॉल के अनुकूल बनाया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम भी ईंधन के अनुपात के अनुसार इंजन का संचालन करता है।
● एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग कैसी होती है?
एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होती है, जिससे इंजन में अनियंत्रित दहन की आशंका कम होती है। विशेष रूप से तैयार इंजन इसका बेहतर लाभ उठा सकता है।
● एथेनॉल मिश्रित ईंधन की चुनौतियां क्या हैं?
जवाब: एथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में प्रति लीटर ऊर्जा कम होती है, जिससे माइलेज घट सकता है। यह कुछ धातुओं, प्लास्टिक और रबर के पुर्जों को भी प्रभावित कर सकता है।

