शिक्षा विभाग का गजब कारनामा, आगरा जेल में बंद शिक्षक को 10 महीने तक मिलती रही सैलरी
आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग का भी गजब हाल है! शिक्षक जेल में बंद है, विभाग उसे निलंबित कर चुका है, लेकिन मानव संपदा पोर्टल पर उसकी उपस्थिति लगातार लगती रही। मामला यहीं नहीं थमा, अक्टूबर महीने का वेतन भी उसके खाते में पहुंच गया। करीब 10 महीने तक पोर्टल पर उपस्थिति लाक होती रही, लेकिन विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
अब यह मामला सामने आने के बाद विभाग में खलबली मच गई है। डीएम मनीष बंसल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दहेज हत्या के आरोप में छह अक्टूबर 2025 से जेल में बंद है सहायक अध्यापक मनोज कुमार
यह मामला फतेहपुर सीकरी के उच्च प्राथमिक विद्यालय कंपोजिट सांथा में तैनात सहायक अध्यापक मनोज कुमार से जुड़ा है। वह 6 अक्टूबर 2025 से दहेज हत्या के आरोप में जेल में बंद है। तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षाधिकारी जितेंद्र गोंड ने 27 अक्टूबर 2025 को उसे निलंबित किया था। निलंबन के समय प्रधानाध्यापिका ने अक्टूबर में पोर्टल पर उसकी अनुपस्थिति दर्ज की थी। इसके बाद नवंबर 2025 से अगस्त 2026 तक उसकी उपस्थिति लगातार लाक कर विभाग को भेजी जाती रही।
पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर वेतन आहरित होता है। ऐसे में जेल में बंद शिक्षक की उपस्थिति दर्ज करने और वेतन जारी होने के मामले में विद्यालय, ब्लॉक और जिला स्तर पर जिम्मेदारी की जांच की जा रही है।
10 महीने तक चलता रहा खेल
पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति के आधार पर वेतन आहरित होता है। ऐसे में जेल में बंद शिक्षक की उपस्थिति दर्ज करने और वेतन जारी होने के मामले में विद्यालय, ब्लाक और जिला स्तर पर जिम्मेदारी की जांच की जा रही है
बिल बाबू से कहा था लॉक कर दें उपस्थिति
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका विमला देवी ने बताया कि शिक्षक का वेतन नहीं निकल रहा था और उपस्थिति भी दर्ज नहीं हो रही थी। उन्होंने बिल बाबू से पोर्टल पर उपस्थिति लाक करने को कहा था। बाद में संशोधन पत्र लगाया जाना था। इसी कारण उपस्थिति लाक की जा रही थी।
