Madhubani News: एकल शिक्षक भी सरप्लस कैसे बने? जिलेभर में शिक्षक डाटा पर उठे सवाल
मधुबनी, जिले के माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। रिपोर्ट में 500 से अधिक शिक्षकों को ऐसे विद्यालयों में भी सरप्लस घोषित कर दिया गया है, जहाँ संबंधित विषय के केवल एक ही शिक्षक कार्यरत हैं और सैकड़ों छात्र अध्ययनरत हैं। मामला सामने आने के बाद शिक्षकों में भारी नाराज़गी है। शिक्षक संगठनों ने इसे छात्रों की पढ़ाई के साथ खिलवाड़ बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
एकमात्र विषय शिक्षक भी घोषित किए गए सरप्लस
वाटसन प्लस टू उच्च विद्यालय में कक्षा 12 के इतिहास विषय की शिक्षिका रिंकू कुमारी, भूगोल के डॉ. दिलीप कुमार नायक, उर्दू के अबू हुरैरा, मैथिली की अर्चना कुमारी, मनोविज्ञान की एकता कुमारी तथा समाजशास्त्र के डॉ. शिवनंदन शर्मा अपने-अपने विषय के एकमात्र शिक्षक हैं। इसके बावजूद सभी को सरप्लस सूची में शामिल कर दिया गया।माध्यमिक स्तर पर भी उर्दू विषय में लगभग 300 छात्रों के बीच कार्यरत ओजैर अहमद, हिंदी में लगभग 800 छात्रों को पढ़ाने वाले संजीव कुमार ठाकुर, संस्कृत के चंदन कुमार तथा गणित की लक्ष्मी मिश्रा को भी सरप्लस दिखाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
कई विद्यालयों में सामने आई यही समस्या
इसी प्रकार पंडौल ब्रह्मोतरा विद्यालय में मैथिली एवं जीवविज्ञान विषय के एकमात्र शिक्षकों को भी सरप्लस घोषित कर दिया गया है। यही स्थिति सूड़ी प्लस टू उच्च विद्यालय, शिवगंगा बालिका प्लस टू उच्च विद्यालय, बैंगरा उच्च विद्यालय सहित जिले के कई अन्य विद्यालयों में भी देखने को मिली है।शिक्षकों का कहना है कि जिन विद्यालयों में किसी विषय का केवल एक ही शिक्षक कार्यरत है, वहाँ उसे सरप्लस घोषित करने का कोई औचित्य नहीं है।
रिक्त पदों की भी नहीं हो रही भरपाई
वाटसन प्लस टू उच्च विद्यालय का उदाहरण कई सवाल खड़े करता है। विद्यालय में प्लस टू स्तर पर 24 स्वीकृत पद हैं, जबकि वर्तमान में केवल 11 शिक्षक कार्यरत हैं। दूसरी ओर विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शिक्षकों को अतिरिक्त घोषित करना समझ से परे है।
डाटा में भारी अंतर का आरोप
शिक्षकों का आरोप है कि विभाग ने विद्यालयों से छात्र-शिक्षक अनुपात की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन विद्यालयों द्वारा भेजी गई वास्तविक रिपोर्ट और विभाग को भेजे गए समेकित डाटा में अंतर है। कई विद्यालयों ने अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता बताई थी, फिर भी संबंधित विषय के एकमात्र शिक्षकों को सरप्लस दिखा दिया गया।डीईओ कार्यालय के कर्मचारियों का कहना है कि कार्यालय से केवल रिपोर्ट विभाग को भेजी गई थी, जबकि डाटा का अपलोड प्रखंड स्तर से किया गया। गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
अभिभावकों में नाराज़गी
जिला औफाक कमेटी के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मो. महताब आलम ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विशेष रूप से उर्दू शिक्षकों को सरप्लस घोषित किए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कई विद्यालयों में उर्दू पढ़ने वाले छात्रों की संख्या पर्याप्त है और वहाँ केवल एक ही शिक्षक कार्यरत हैं। इसके बावजूद उर्दू के स्वीकृत पद समाप्त मानकर शिक्षकों को सरप्लस घोषित करना छात्रों के हितों के खिलाफ है।
शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति
माध्यमिक शिक्षक संघ के सचिव शंभूनाथ झा ने कहा कि जिले में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। जहाँ सैकड़ों छात्र हैं और विषय का केवल एक शिक्षक है, वहाँ उसे सरप्लस घोषित करना शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के साथ न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
क्या कहते हैं अधिकारी?
जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) अक्षय कुमार पांडेय ने बताया कि सभी उच्च माध्यमिक विद्यालयों से रिपोर्ट मंगाकर उसे समेकित रूप से विभाग को भेजा गया था। सरप्लस संबंधी अंतिम निर्णय विभाग स्तर पर लिया गया है तथा इसकी जानकारी संबंधित शिक्षकों को विभाग द्वारा व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध करा दी गई है।

