असिस्टेंट प्रोफेसर के 28 विषयों का इंटरव्यू पुरानी परीक्षा से होगा
अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर भर्ती का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के 17 अप्रैल 2026 के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए शीर्ष कोर्ट ने आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिकाओं को मंगलवार को खारिज कर दिया है। इसी के साथ साफ हो गया है कि 33 विषयों में से 28 विषयों का साक्षात्कार 16-17 अप्रैल 2025 को पहली बार आयोजित परीक्षा के आधार पर होगा, जबकि पांच विषयों का इंटरव्यू 18-19 अप्रैल 2026 को आयोजित लिखित परीक्षा के आधार पर होगा।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि प्रश्नपत्र लीक से संबंधित उपलब्ध सामग्री उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और प्राणी विज्ञान पांच विषयों से संबंधित थी। इन विषयों में प्रभावित और अप्रभावित अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं होने के कारण इनकी पुनर्परीक्षा कराई जाए। वहीं, 28 अन्य विषयों के संबंध में प्रश्नपत्र लीक से जुड़ी कोई सामग्री सामने नहीं आई। इनके लिए 16-17 अप्रैल 2025 को हुई मूल लिखित परीक्षा को ही आधार बनाए जाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 18 और 19 अप्रैल 2026 को सभी 33 विषयों की पुनर्परीक्षा कराई थी।
आयोग ने 29 जून को सभी 33 विषयों का परिणाम घोषित करते हुए सफल 3155 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार 21 जुलाई से प्रस्तावित किए थे। हालांकि बाद में कुछ अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी जिसके कारण साक्षात्कार नहीं हो सके थे। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस विज्ञापन में कानूनी विवाद का पटाक्षेप हो गया है। हालांकि 28 विषयों की पुनर्परीक्षा में चयन की उम्मीद लगाए सैकड़ों अभ्यर्थियों को निराशा हुई है। गौरतलब है कि 16-17 अप्रैल 2025 को आयोजित परीक्षा में धांधली के कारण सरकार ने पूरी परीक्षा निरस्त कर दी थी। आयोग के पीआरओ डॉ. संजय कुमार सिंह का कहना है कि गुरुवार को होने वाली बैठक में इस पर चर्चा होगी।

