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Friday, November 6, 2026

प्रवक्ता भर्ती 2025: पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए गणित के 16 सवालों पर विशेषज्ञों की राय तलब, 16 नवंबर तक परिणाम पर रोक

प्रवक्ता भर्ती 2025: पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए गणित के 16 सवालों पर विशेषज्ञों की राय तलब, 16 नवंबर तक परिणाम पर रोक

प्रयागराज — इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों के लिए आयोजित प्रवक्ता भर्ती-2025 के गणित विषय की परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए सवालों को लेकर विशेषज्ञों से राय मांगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने अदालत को आश्वस्त किया है कि अगली सुनवाई की तिथि यानी 16 नवंबर तक परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा।

यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने प्रयागराज निवासी हर्ष सक्सेना एवं छह अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।



याचियों के अधिवक्ता ने अदालत में दलील पेश की कि प्रवक्ता भर्ती-2025 के तहत गणित विषय की परीक्षा में पूछे गए 20 प्रश्नों में से लगभग 16 प्रश्न वर्ष 2020 में राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) प्रवक्ता पद के लिए आयोजित परीक्षा के प्रश्नपत्र से ज्यों के त्यों दोहराए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि ये प्रश्न आयोग द्वारा जारी विज्ञापन में निर्धारित गणित विषय के पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थे। पाठ्यक्रम से इतर प्रश्न पूछे जाने के कारण सीधे तौर पर अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हुए हैं।


सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि 16 नवंबर तक परिणाम जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने विवादित प्रश्नों के पाठ्यक्रम में शामिल होने अथवा न होने की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विषय विशेषज्ञों की राय लेने हेतु मोहलत मांगी। इस पर अदालत ने आयोग को एक सप्ताह का समय देते हुए विशेषज्ञों से विधिवत राय प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।


जालौन के स्कूल भवनों की जांच संबंधी जनहित याचिका खारिज


एक अन्य मामले में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जालौन जिले में संचालित स्कूल भवनों के निर्माण में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए दाखिल जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने नीरज श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई करते हुए याची की साख, पृष्ठभूमि और याचिका दाखिल करने की मंशा पर कड़े सवाल उठाए।


अदालत ने कहा कि याची ने स्वयं को केवल समाजसेवी बताया है, जबकि उसकी योग्यता और इस मामले में वास्तविक रुचि का कोई ठोस विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया। याचिका की विषयवस्तु से प्रतीत होता है कि याची का मामले से कोई सीधा सरोकार नहीं है और यह याचिका किसी अन्य के कहने पर दाखिल की गई जान पड़ती है। इसलिए इसे सद्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता। याचिका में 2017 से 2023 के बीच निर्मित स्कूल भवनों की जांच हेतु तकनीकी समिति गठित करने की मांग की गई थी।



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