शिक्षकों के दस्तावेजों की दोबारा जांच और TET पर फिर गरमाई शिक्षक राजनीति, प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के कार्यरत शिक्षकों के नियुक्ति संबंधी दस्तावेज जुटाने और उनकी दोबारा जांच कराने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने विभाग के इस कदम को अनुचित बताते हुए शिक्षकों से अपने शैक्षिक एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र विभागीय कार्यालयों में दोबारा जमा नहीं करने की अपील की है। संगठन ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर 18 नवंबर को प्रदेश के सभी जिलों में बीएसए कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
नियुक्ति के समय हो चुका है प्रमाणपत्रों का सत्यापन
शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति के समय सभी शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संबंधी प्रमाणपत्रों का बहुस्तरीय सत्यापन कराया जा चुका है। सत्यापन के बाद ही शिक्षकों का वेतन जारी किया गया था। ऐसे में सभी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की दोबारा एसटीएफ से जांच कराना उचित नहीं है।
संघ के मुताबिक जांच केवल उन्हीं शिक्षकों की होनी चाहिए, जिनके खिलाफ कोई शिकायत प्राप्त हुई है अथवा जिनका मामला पहले से जांच के दायरे में है।
18 नवंबर को सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने सात सूत्रीय मांगों को लेकर 18 नवंबर को प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
संगठन ने विभाग से शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।
शिक्षक संघ की सात प्रमुख मांगें
पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए।
शिक्षकों को उपार्जित अवकाश दिया जाए।
शिक्षकों की स्थानांतरण सूची जारी की जाए।
प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति की जाए।
नियुक्ति संबंधी प्रमाणपत्रों की अनावश्यक दोबारा जांच बंद की जाए।
शिक्षकों के सेवा संबंधी मामलों में न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाए।
TET अनिवार्यता के मुद्दे पर शिक्षकों को राहत दी जाए।
TET अनिवार्यता पर भी संघ ने उठाए सवाल
शिक्षक संघ ने TET अनिवार्यता के मुद्दे पर भी सरकार से राहत देने की मांग की है। संघ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य किए जाने के मामले में प्रदेश सरकार ने विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था।
इसके साथ ही कार्यरत गैर-TET शिक्षकों को 30 जून 2027 तक की छूट देकर पदोन्नति का अवसर देने की मांग भी उठाई गई है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो लखनऊ में होगा बड़ा आंदोलन
समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार, संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो लखनऊ में भी बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने शिक्षकों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है।
संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने जिला अध्यक्षों और मंत्रियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शन के बाद डीएम के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजा जाए।

