फर्जीवाड़ा कर दिव्यांगता कोटि से ली शिक्षक की नौकरी, निलंबित
दिव्यांग नहीं होते हुए भी दिव्यांगता कोटि से डीएलएड कर बीपीएससी से शिक्षक बनी। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आने पर शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया है। बुधवार को डीईओ ने उसे निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाही के अधीन किया।
सकरा की शिक्षिका शिवानी कुमारी को श्रवण बाधित कोटे पर डीएलएड की डिग्री मिली और इसी आधार पर आयोग ने टीआरई-3 में उसका चयन किया। जांच में मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने उससे स्पष्टीकरण मांगा। इसके जवाब में कहा कि उसने कोई दिव्यांगता प्रमाणपत्र नहीं बनवाया। इसके बाद वैशाली टीचर ट्रेनिंग कॉलेज सोरहरथ से जांच कराई गई। इसमें पता चला कि उसने दिव्यांगता प्रमाणपत्र लगाकर ही नामांकन लिया गया था। डीईओ कुमार अरविन्द सिन्हा ने बताया कि शिक्षिका के खिलाफ परिवाद पत्र प्राप्त हुआ। स्पष्टीकरण मांगने के साथ जांच कराई गई। इसमें मामला सत्य पाया गया। इससे
तीन प्रखंडों ने ही दी बाहर के शिक्षकों की सूची, स्पष्टीकरण
मुजफ्फरपुर। जिले के तीन प्रखंडों ने ही बिहार से बाहर के शिक्षकों की सूची शिक्षा विभाग को दी है। निगरानी व उप माध्यमिक शिक्षा निदेशक के निर्देश के बाद भी 13 प्रखंडों से ऐसे शिक्षकों की सूची नहीं सौंपी गई है। बीपीएससी टीआरई में फर्जी आरक्षण पर लाभ लेने वाले शिक्षकों को बचाने का खेल जिले में चल रहा है। आरक्षित कोटि का लाभ लेकर सूबे से बाहर के अभ्यर्थियों की नियुक्ति मामले में जिले में जांच हो रही है। लेकिन, सिर्फ तीन प्रखंडों ने ही इन शिक्षकों की सूची दी है। डीईओ कुमार अरविन्द सिन्हा ने बताया कि तीन प्रखंडों में दर्जनभर से अधिक शिक्षकों का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। इन प्रखंडों में सरैया, कुढ़नी व मोतीपुर शामिल है।
स्पष्ट है कि शिक्षिका ने विभाग को गुमराह कर नौकरी प्राप्त की। उनको तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय अधीन कर दिया

