69000 शिक्षक भर्ती विवाद निर्णायक मोड़ पर, 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई
आरक्षण से जुड़े विवाद के बीच मेधावी OBC-SC अभ्यर्थियों की अनारक्षित सीटों पर माइग्रेशन और कार्यरत शिक्षकों को हटाने के मुद्दे पर होगी सुनवाई
लखनऊ। 69 हजार शिक्षक भर्ती का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक चरण में पहुंच गया है। 22 सितंबर को होने वाली सुनवाई में मेधावी OBC-SC अभ्यर्थियों को अनारक्षित सीटों पर माइग्रेशन का लाभ देने और करीब छह वर्ष से कार्यरत 67,867 शिक्षकों की नियुक्ति बचाने से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई होनी है।
69 हजार पदों के लिए जून 2020 में 67,867 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई थी। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आने के बाद मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
मेधावी अभ्यर्थियों के माइग्रेशन का मुद्दा
विवाद के प्रमुख बिंदुओं में मेधावी OBC और SC अभ्यर्थियों को आरक्षित सीटों के बजाय अनारक्षित सीटों पर माइग्रेशन का लाभ दिए जाने का मुद्दा शामिल है।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने 29 मई 2021 की रिपोर्ट में OBC को 27 प्रतिशत के बजाय 3.86 प्रतिशत और SC को 21 प्रतिशत के बजाय 16.2 प्रतिशत आरक्षण मिलने की बात कही थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने जनवरी 2022 में 6,800 अभ्यर्थियों की अतिरिक्त चयन सूची जारी की थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।
चयनित शिक्षकों की नियुक्ति बचाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान कार्यरत शिक्षकों की ओर से भी पक्ष रखा गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने बताया कि चयनित शिक्षक करीब छह वर्षों से सेवा दे रहे हैं।
उनका तर्क था कि जिन आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आयु, शुल्क या अन्य रियायत का लाभ लिया है, उन्हें अनारक्षित सीटों पर माइग्रेशन का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।
सरकार का क्या कहना है?
रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि करीब छह वर्ष से कार्यरत शिक्षकों को हटाने के बजाय उनकी नियुक्तियां सुरक्षित रखी जानी चाहिए। सरकार ने यह भी कहा कि विवाद का समाधान करते समय कार्यरत शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखा जाना जरूरी है।
हालांकि, आरक्षण व्यवस्था से जुड़े अन्य पक्षों की ओर से अलग-अलग दलीलें रखी गई हैं। अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाया जाएगा।
22 सितंबर की सुनवाई पर नजर
अब 22 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर हजारों अभ्यर्थियों और वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की नजर है। सुनवाई में माइग्रेशन, आरक्षण के लाभ और कार्यरत शिक्षकों की नियुक्तियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अदालत के समक्ष दलीलें रखी जाएंगी।
इस मामले में अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

