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Monday, September 21, 2026

महिलाओं के लिए जाति प्रमाणपत्र बना मुसीबत,बेसिक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग की अभ्यर्थी नियम-शर्तों से परेशान

महिलाओं के लिए जाति प्रमाणपत्र बना मुसीबत,बेसिक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग की अभ्यर्थी नियम-शर्तों से परेशान

प्रयागराज, शहरी क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों के 11508 और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के संबद्ध प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक के 897 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन में आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार आरक्षित श्रेणी के ऐसे अभ्यर्थी जो उत्तर प्रदेश राज्य के मूल निवासी नहीं हैं, उन्हें इन वर्गों को मिलने वाली छूट का लाभ अनुमन्य नहीं है। ऐसे अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी के माने जाएंगे।






वहीं महिला अभ्यर्थियों के मामले में पिता पक्ष से निर्गत जाति प्रमाण-पत्र ही मान्य होगा। अब समस्या यह है कि जाति प्रमाणपत्र बनाने में कुछ शादीशुदा महिला अभ्यर्थियों को परेशानी हो रही है, क्योंकि शादी होने के बाद आधार कार्ड में पता बदल गया है। जबकि जाति प्रमाणपत्र पितापक्ष का मांगा जा रहा है। ससुराल पक्ष का पता होने के कारण, कई लेखपाल प्रमाणपत्र को सत्यापित नहीं कर रहे। जाति प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन स्वघोषणा पत्र भरवाया जाता है कि मेरी जाति यह है। शादीशुदा महिलाओं के मामले में स्वघोषणा पत्र में मायके और ससुराल पक्ष के पते का भी जिक्र करना होता है। वैसे भी प्रमाणपत्र जाति का बनना है तो उसमें पता से कोई लेनादेना नहीं, क्योंकि पता का महत्व निवास प्रमाणपत्र में होता है। इसके बावजूद जाति प्रमाणपत्र के लिए मिले आवेदन कुछ लेखपाल आधार में पता अलग होने के कारण रिजेक्ट कर दे रहे हैं।

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