प्रधानाचार्य भर्ती में सहायक अध्यापकों और प्रवक्ताओं को अनुभव के आधार पर मिले छूट
माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा निदेशक को भेजा पत्र, बीएड प्रशिक्षण की अनिवार्यता में बदलाव की मांग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) ने प्रधानाचार्य भर्ती में सहायक अध्यापकों और प्रवक्ताओं को अनुभव के आधार पर बीएड प्रशिक्षण की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की है। संगठन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री और शिक्षा निदेशक माध्यमिक को पत्र भेजकर भर्ती की अर्हता में संशोधन की मांग उठाई है।
3 सितंबर की संशोधित अर्हता में बदलाव की मांग
संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने पत्र में कहा है कि शासन की ओर से 3 सितंबर 2026 को संशोधित की गई प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक पद की अर्हता में बदलाव किया जाए।
संघ ने मांग की है कि परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता समाप्त की जाए। इसके साथ ही पूर्व से नियुक्त प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों को उनके अनुभव के आधार पर बीएड के समकक्ष प्रशिक्षण (एलटी आदि) को संस्था प्रधान के पद के लिए मान्य किया जाए।
2500 पदों पर भर्ती की तैयारी
पत्र में कहा गया है कि करीब 2500 रिक्त पदों पर लगभग 13 साल बाद उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से लिखित परीक्षा से भर्ती की तैयारी की जा रही है।
संघ का कहना है कि प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। इन पदों को परीक्षा आयोजित कर जल्द भरने की जरूरत है।
अर्हता में अचानक बदलाव का आरोप
संघ ने आरोप लगाया कि शासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से विज्ञापन से ठीक पहले 3 सितंबर को प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक की अर्हता में अचानक संशोधन किया गया। संगठन का कहना है कि इससे वर्तमान में विद्यालयों में कार्यरत बड़ी संख्या में शिक्षकों के परीक्षा में आवेदन करने का अवसर प्रभावित हो सकता है।
माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा निदेशक से मामले में हस्तक्षेप करते हुए संशोधित अर्हता पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
शिक्षक संघ ने रखीं प्रमुख मांगें
संघ की ओर से मुख्य रूप से—
परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता समाप्त करने,
पूर्व से नियुक्त प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों के अनुभव को महत्व देने,
अनुभव के आधार पर बीएड के समकक्ष प्रशिक्षण को मान्यता देने,
प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक भर्ती की अर्हता में किए गए संशोधन पर पुनर्विचार करने
की मांग की गई है।
अब देखना होगा कि शासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षक संघ की इन मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।
