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Wednesday, April 1, 2026

आधार से होगी दूल्हा-दुल्हन की पहचान, उसके बाद पंजीकरण

आधार से होगी दूल्हा-दुल्हन की पहचान, उसके बाद पंजीकरण



निबंधन विभाग में विवाह पंजीकरण में भी अब दूल्हा-दुल्हन और दोनों पक्षों के गवाहों की पहचान बायोमीट्रिक से आधार का सत्यापन कराकर की जाएगी। इसके बाद विवाह पंजीकृत होगा। फर्जीवाड़ा रोकने तथा वास्तविक लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव के आदेश पर यह व्यवस्था एक अप्रैल से प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों पर शुरू कर दी जाएगी। यहां के छह उप निबंधक कार्यालयों में भी आवश्यक उपकरण मंगलवार को उपलब्ध करा दिए गए।


अब प्रदेश में निबंधन विभाग में होने वाले विवाह पंजीकरण में फर्जीवाड़ा नहीं हो सकेगा। बायोमीट्रिक के माध्यम से आधार का सत्यापन कराना आवश्यक कर दिया है। महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने इस संबंध में सभी जनपदों


मुख्य सचिव के आदेश पर आज से सभी उप निबंधक कार्यालयों में शुरू होगी व्यवस्था


गवाहों का सत्यापन, बायोमीट्रिक में समस्या होगी तो आंखें होंगी स्कैन, लगी डिवाइस


मेरठ: विवाह पंजीकरण के लिए उप निबंधक द्वितीय सदर कार्यालय में स्थापित वायोमीट्रिक मशीन जागरण »


के एआइजी निबंधन को आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक यह व्यवस्था 31 मार्च से लागू की जानी थी। आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था के बाद अब इसे बुधवार से लागू किया जाएगा। इसके लिए विशेष रूप से एनआइसी शिविर कार्यालय लखनऊ द्वारा नया साफ्टवेयर विकसित किया गया है, जो बायोमीट्रिक की मदद से आधार का सत्यापन केंद्र सरकार के आधार


के डेटा बेस से करेगा। जिन लोगों के हाथों की अंगुलियां स्कैन नहीं होंगी उनकी आंखों को इरीस स्कैनर के माध्यम से स्कैन करके पहचान की जाएगी। इस नए साफ्टवेयर में ही विवाह पंजीकरण का आनलाइन आवेदन किया जाएगा। इसमें पहले आधार का सत्यापन ओटीपी के माध्यम से होगा। इसके बाद उप निबंधक कार्यालय में बायोमीट्रिक होगी। एआइजी शर्मा नवीन कुमार


एस ने बताया कि जिले के सभी छह उप निबंधक कार्यालयों में इसके लिए बायोमीट्रिक आरडी डिवाइस उपलब्ध करा दी गई हैं।


रोजाना औसतन 25 विवाह पंजीकरण, महीने में 600 : एआइजी ने बताया कि निबंधन विभाग में विवाह पंजीकरण उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली 2017 के तहत शादी के बाद किया जाता है। इसमें दूल्हा, दुल्हन और गवाहों के पहचान पत्रों, फोटो और विवाह के प्रमाण के आधार पर पंजीकरण होता है। अलग-अलग धर्म और जाति के दूल्हा-दुल्हन की शादी जिलाधिकारी न्यायालय में पंजीकृत कराई जाती है। जनपद के सभी छह कार्यालयों में रोजाना औसतन 25 और महीने में 600 विवाह पंजीकरण होते हैं। एक वर्ष के भीतर पंजीकरण कराने पर मात्र 10 रुपये फीस देनी होती है जबकि विलंब होने पर 50 रुपये प्रतिवर्ष लगती है।

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