टीजीटी भर्ती में रिक्त पदों पर समायोजन के निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती मामले में रिक्त पदों पर अपीलार्थियों को नियुक्ति देने और समायोजित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने नरेंद्र प्रताप सिंह व अन्य की विशेष अपील सहित नौ जुड़ी अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है।
ये अपीलें कृष्ण कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में एकल पीठ के पांच दिसंबर 2025 के आदेश के विरुद्ध दाखिल की गई थीं। एकल पीठ ने मार्च 2021 में जारी विज्ञापन संख्या 1/2021 के तहत हुई टीजीटी परीक्षा की उत्तरकुंजी (26 अक्तूबर 2021) के प्रश्न संख्या 2, 13 व 35 (बुकलेट सीरीज बी) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार करते हुए याचियों को अतिरिक्त अंक देने का आदेश दिया था लेकिन नियुक्ति का लाभ केवल तभी देने की बात कही थी जब संबंधित विषयों में पद रिक्त हों। याचियों ने रणविजय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उन्हें केवल अंकों में सुधार नहीं बल्कि चयन और नियुक्ति का पूरा परिणामी लाभ मिलना चाहिए। खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि मुकदमेबाजी कोई शैक्षणिक अभ्यास नहीं है और एक बार जब याचियों का अधिकार सिद्ध हो जाता है, तो असाधारण परिस्थितियों के अभाव में उन्हें परिणामी राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) से जानकारी मांगी। संबंधित तीन विषयों में कुल 54 पद रिक्त हैं, जिसमें सामाजिक विज्ञान में 44 (सामान्य 20, ओबीसी 12, अनुसूचित जाति 11, ईडब्ल्यूएस 1) पद रिक्त है।
इस पर खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश में संशोधन करते हुए तीन-चरणीय व्यवस्था देते हुए कहा सफल अपीलार्थी पहले विज्ञापन संख्या 1/2021 के तहत बचे हुए रिक्त पदों पर विषयवार व अंतर-मेधा क्रम में समायोजित होंगे। यदि पद कम पड़ें तो शेष याची विज्ञापन के बाद उत्पन्न हुई अन्य रिक्तियों पर समायोजित किए जाएंगे। फिर भी समायोजन न हो पाने की स्थिति में राज्य सरकार द्वारा सृजित अतिरिक्त मानद पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। कोर्ट ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को निर्देश दिया कि पांच वर्ष से लंबित इस मामले में सभी नियुक्ति पत्र दो महीने के भीतर जारी किए जाएं और यदि अतिरिक्त पद सृजित करने की जरूरत पड़े तो यह कार्य अगले तीन माह में पूरा हो।

