वित्तविहीन शिक्षकों की सेवा नियमावली से संबंधित प्रश्न का उत्तर*
यूपी के 23 हजार वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं, विधानसभा में सरकार ने दिया जवाब
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षकों के मानदेय, सेवा शर्तों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला विधानसभा में उठा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के समान मानदेय, स्थिर सेवा शर्तें, EPF, चिकित्सा सुविधा एवं अन्य सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए फिलहाल कोई नियमावली बनाने पर विचार नहीं किया जा रहा है।
विधानसभा में पूछा गया तारांकित प्रश्न
विधानसभा के तृतीय सत्र 2026 के प्रथम मंगलवार के लिए निर्धारित तारांकित प्रश्न संख्या-20 के माध्यम से विधायक श्री राहुल राजपूत उर्फ राहुल लोधी (हरदोई) ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री से वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की स्थिति को लेकर सवाल पूछा।
प्रश्न में कहा गया कि उत्तर प्रदेश में संचालित लगभग 23 हजार वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षक लंबे समय से अत्यंत अल्प मानदेय, अस्थिर सेवा शर्तों तथा विद्यालय प्रबंधन की मनमानी के बीच शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इस पर सरकार से पूछा गया कि क्या वह इस स्थिति से अवगत है?
इस सवाल के जवाब में सरकार की ओर से स्पष्ट रूप से "जी नहीं" कहा गया।
सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाओं के लिए बनेगी नियमावली?
विधायक ने दूसरा महत्वपूर्ण सवाल पूछा कि क्या सरकार वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए समानजनक मानदेय, स्थिर सेवा शर्तें, EPF, चिकित्सा सुविधा और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कोई ठोस नियमावली बनाने पर विचार करेगी?
इस प्रश्न पर भी सरकार का जवाब "जी नहीं" रहा।
मानदेय को लेकर सरकार ने बताई मौजूदा व्यवस्था
सरकार की ओर से दिए गए विस्तृत जवाब में वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्तों से संबंधित शासनादेश दिनांक 10 अगस्त 2001 का उल्लेख किया गया है।
इसके मुताबिक अंशकालिक अध्यापकों को विद्यालय प्रबंधन द्वारा मानदेय का भुगतान किया जाएगा। यह भुगतान पूरे शिक्षण सत्र के लिए नियमित रूप से किया जाना है। इसमें जुलाई और अगस्त का अवकाश भी शामिल है।
सरकार के जवाब के अनुसार शिक्षकों को दिया जाने वाला मानदेय न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कुशल श्रमिक के लिए समय-समय पर निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होना चाहिए।
भविष्य निधि और जीवन बीमा का भी प्रावधान
विधानसभा में दिए गए जवाब में यह भी कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन ऐसे अंशकालिक अध्यापकों के लिए यथाविधि भविष्य निधि तथा जीवन बीमा की योजनाएं लागू करेगा।
हालांकि इन योजनाओं में शिक्षक का अंशदान संबंधित विद्यालय प्रबंधन द्वारा अपने निजी स्रोतों से दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
लाखों वित्तविहीन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण जवाब
विधानसभा में आया यह जवाब प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है। एक ओर सरकार ने वर्तमान शासनादेश के तहत मानदेय, भविष्य निधि और जीवन बीमा संबंधी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई ठोस नियमावली बनाने के सवाल पर फिलहाल सहमति नहीं जताई है।
इससे वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय, स्थायी सेवा शर्तों, EPF, चिकित्सा सुविधा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मांगें एक बार फिर चर्चा में आ सकती हैं।

