भावनाओं पर नहीं, दस्तावेजों पर हो बहस : 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाले के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहस भावनात्मक नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए। जस्टिस एसबीएन भट्टी और जस्टिस एनबी अंजारिया की पीठ के समक्ष करीब 45 मिनट सुनवाई हुई।
चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कहा कि आरक्षित वर्ग को टीईटी में आयु, शुल्क और उत्तीर्णार्क में छूट मिली। अब सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा (एटीआरई) में भी छूट ली जा रही है। यह दोहरा आरक्षण है। कोर्ट ने कहा कि टीईटी केवल पात्रता परीक्षा है, नियुक्ति पत्र नहीं। पूछा कि एटीआरई स्क्रीनिंग टेस्ट है या नहीं। अधिवक्ता ने हां में जवाब दिया। कोर्ट ने पूछा कि फिर दोहरा आरक्षण कैसे हुआ।
शोभा गुप्ता ने बताया कि लखनऊ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने एटीआरई को चयन का हिस्सा माना था। खंडपीठ ने आरक्षण नियमों के अनुसार नई सूची बनाने का आदेश दिया था। पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों की दलील पर कोर्ट ने कहा कि बहस कागजात तक सीमित रखें और पुरानी बातें न दोहराएं। बता दें कि इस भर्ती में ओबीसी को 27 की जगह 3.86% और एससी को 21 की जगह 16.2% आरक्षण मिला था। हाईकोर्ट ने 13 अगस्त 2024 को पूरी सूची रद्द कर नई सूची बनाने का आदेश दिया था। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने भी रिपोर्ट दी थी। सुनवाई बुधवार को जारी रहेगी
