वेतन पुनरीक्षण पर सकारण आदेश का निर्देश
● आदेश उन्हीं कर्मचारियों तक सीमित रहेगा, जिन्होंने आवेदक एक व दो के माध्यम से यह याचिका की है
● नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक व प्रधान महालेखाकार कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों का है मामला
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की इलाहाबाद पीठ ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक व प्रधान महालेखाकार कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों के 4600 रुपये ग्रेड पे और एक जनवरी 2006 से वेतन पुनरीक्षण के मामले में सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों के लंबित प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार और 13 नवंबर 2009 के कार्यालय ज्ञापन के आलोक में एक महीने के भीतर एक सकारण व स्पष्ट आदेश किया जाए।
यह आदेश कैट के न्यायिक सदस्य Xन्यायमूर्ति राजीव जोशी एवं प्रशासनिक सदस्य अंजनी नंदन शरण की खंडपीठ ने सिविल ऑडिट एसोसिएशन कैटेगरी तृतीय (कार्यालय प्रधान महालेखाकार-ऑडिट प्रथम, प्रयागराज) व अन्य की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया है। Xयाचियों की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र नायक व उनके सहयोगी विनोद कुमार ने दलील दी कि याची एक जनवरी 2006 से 4600 रुपये ग्रेड पे और वेतन पुनरीक्षण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने 13 नवंबर 2009 के उस ओएम का हवाला दिया, जिसमें एक जनवरी 2006 को 6500-10500 रुपये के पूर्व-संशोधित वेतनमान वाले पदों के लिए पे-बैंड पीबी 2 में 4600 रुपये का ग्रेड पे देने का प्रावधान किया गया था।
Xएडवोकेट नायक ने पीठ को बताया कि कर्मचारियों ने इस संबंध में विभाग को प्रत्यावेदन और अनुस्मारक पत्र भेजा था लेकिन उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने अनुरोध किया कि विभाग को लंबित प्रत्यावेदन तय करने का निर्देश दे दिया जाए, तो वे संतुष्ट होंगे। Xकेंद्र सरकार व सीएजी की ओर से उपस्थित अधिवक्ता प्रभाव श्रीवास्तव ने इस निर्देश पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद अधिकरण ने मामले के मेरिट (गुण-दोष) पर विचार किए बिना याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के एक माह के अंदर सक्षम प्राधिकारी कर्मचारियों के प्रत्यावेदन पर सकारण आदेश कर उन्हें सूचित करे। X

