सरकारी सेवा से नहीं बच सकते डॉक्ट
● पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश संग लागू होती सेवा शर्त
● थोड़ी देरी से बांड की बाध्यता खत्म नहीं होती
लखनऊ,। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा है कि सरकारी मेडिकल संस्थानों में रियायती दर पर स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा का लाभ लेने वाले डॉक्टर अनिवार्य सरकारी सेवा बांड के तहत जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते। सरकार ने पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के साथ दो वर्ष की अनिवार्य सेवा की शर्त रखी है ताकि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। मरीजों के जीवन के हक की रक्षा की जा सके। प्रशासनिक स्तर पर थोड़ी देरी से बांड की बाध्यता खत्म नहीं हो जाती।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ व अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने एसजीपीजीआई, लखनऊ से एमडी (ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन) करने वाली डॉ. अपारूपा सेन गुप्ता की याचिका पर यह टिप्पणी की। याची का कहना था कि पाठ्यक्रम पूरा होने के तीन माह के भीतर राज्य सरकार की ओर से सेवा उपलब्ध नहीं कराने से दो वर्ष का अनिवार्य सेवा बांड खत्म माना जाए।

